सोशल मीडिया पर चाँदबाग की वो वीडियो सैलाब की तरह तैर रही है, जिसमें मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों पर पत्थर से हमला कर उन्हें घायल किया। लेकिन, इसके बाद भी सुशांत सिंह पूछते हैं कि दिल्ली की हिंसक भीड़ में औरतें थीं क्या? मैंने तो नहीं सुना। सोचिए कितना शर्मसार करने वाला है सुशांत का ये ट्वीट।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हुँगा कवासी की हत्या की घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लिए पुलिस दल रवाना किया गया और घटना के लिए जिम्मेदार नक्सलियों की खोज शुरू की गई। कवासी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
कर्नाटक कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष श्रीवत्स ने लिखा कि उस फैजान का क्या, जिसे दिल्ली पुलिस ने 'लाठी से पीट-पीट कर मार डाला?' उन्होंने दावा किया कि बाकी के 40 पीड़ित परिवारों को यूँ ही छोड़ दिया गया है। इसी तरह बाकी इस्लामी कट्टरपंथी भी गुस्से में नज़र आए।
ये हरा-हरा सा एक फिल्टर
जो तुमने चढ़ा कर रक्खा है
उससे भगवा छँट जाता है
हिन्दू गायब हो जाता है
दिखता है बस इमरान-जुबैर
अंकित-दीपक छुप जाता है
ओ वामपंथ के रखवाले
ओ लम्पट लिबरल तुम साले!
दिल्ली दंगो की व्यथा सुनाती इस कविता को पढ़ें, सुनें औरों तक पहुँचाएँ। आप इसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर आगे बढ़ाएँ।
ईद पर मटन-बिरयानी के गुलछर्रे उड़ाने वाली रुचि क्रिसमस पर 'भक्तों' को 'गाय के पेशाब की जगह शराब पीने' की सलाह देती हैं। जैसे ही महाशिवरात्रि आती है, रुचि के अंदर का सामाजिक कार्यकर्ता जाग उठता है और वो फ़र्ज़ी ज्ञान देने लगती हैं। सारे सलाह हिन्दुओं के लिए ही हैं क्या?
ऑपइंडिया किसी भी प्रकार की हिंसा को बढ़ावा नहीं देता। चप्पल मारना भले ही किसी की खीझ की अभिव्यक्ति हो सकती है, वो एक विरोध का तरीका हो सकता है, लेकिन यह तरीका सही नहीं है, भले ही देश विरोधी वामपंथी ही इसका शिकार क्यों न हो रहे हों।
राजद्रोह के केस होने के बाद दो दिन से बिहार में छापेमारी करने पहुँचे पाँच सदस्यों के पुलिस दल को यह बात पता चली की शरजील अपनी प्रेमिका के संपर्क में है। जिसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका से संपर्क किया और उसकी मदद से शरजील इमाम गिरफ्तार हो पाया।
देश के ख़िलाफ़ बयानबाजी करने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में छिपाया जाता रहा है। उनके प्रति संवेदना दिखाई जाती रही है। एक तय क्रम के साथ उनके विवादों में आने के बाद उन्हें हीरो बनाने की कोशिश हुई। उससे पहले से मालूम चल चुका है कि शर्जील इमाम के मामले में अब आगे क्या होगा?
यह देखना हास्यास्पद है कि जब इस CAA-NRC विरोध प्रदर्शन को शुरू करने वाला शाहीन बाग ही शरजील इमाम से पीछा छुड़ाना चाह रहा है, तब यहाँ जेएनयू में अपनी पहचान तलाश रहा BAPSA शरजील के मुस्लिम होने और सताए जाने की बात करते हुए इसमें ब्राह्मणवाद निकाल लाया है।
इस वीडियो में आफरीन फातिमा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए देखी जा रही है। वीडियो में आफरीन फातिमा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और अफजल गुरु की फाँसी के फैसलों पर संदेह जताते हुए...