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विज्ञान

क्या है क्लाउड सीडिंग, कैसे होती है ‘आर्टिफिशियल रेन’: क्या इससे स्वच्छ होती है हवा?

दिल्ली में प्रदूषण से निजात पाने के लिए क्लाउड सीडिंग तकनीक की मदद से आर्टिफिशियल बारिश होने जा रही है। जाने कैसे काम करती है ये तकनीक। कैसे एयरक्राफ्ट बनाते हैं बादल।

अब ट्रेन से भी होगी मिसाइल लॉन्च, सफल हुई ‘अग्रि प्राइम’ की टेस्टिंग: 2000 KM है रेंज

भारत ने ट्रेन लॉन्चर से अग्नि प्राइम मिसाइल लॉन्च किया। यह प्रक्षेपण DRDO ने किया है। 2000 KM रेंज वाली ये अग्नि रेंज की आधुनिकतम मिसाइल है।

‘मौसम’ बताने को भारत ने बनाया दुनिया का ‘बेस्ट सिस्टम’, सुपरकंप्यूटर Arka से चलेगा: जानिए महिला वैज्ञानिकों ने कैसे तैयार किया BFS, हर एक...

देश ने अत्याधुनिक 'भारत फोरकास्ट सिस्टम' (BFS) का अनावरण किया है। ये प्रणाली 6 किलोमीटर के रिजॉल्यूशन के साथ दुनिया का सबसे सटीक मौसम पूर्वानुमान कर सकता है।

क्या ‘सोम यज्ञ’ करने से सच में होती है वर्षा… वैज्ञानिकों ने ‘सनातन परंपरा’ पर शुरू किया शोध, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में अनुष्ठान...

क्या वैदिक रीति-रिवाज से किए गए सोम यज्ञ और बारिश के बीच कोई संबंध है, इस बात का पता लगाने के लिए हाल में वैज्ञानिकों द्वारा शोध किया गया है।

अब प्रकाश को छू भी सकते हैं… क्या है ‘सुपर सॉलिड लाइट’, इससे कितना बदलेगा हमारा जीवन: सरल शब्दों में समझिए विज्ञान

न्यूटन और हाइजेंस के जमाने से ही यह बहस चल रही है कि प्रकाश असल में है क्या? कोई कण या तरंग? इटली के वैज्ञानिकों ने इसे एक नया आयाम दिया है।

SpaDex की डॉकिंग पूरी, ISRO ने अंतिरक्ष में जोड़े दोनों सैटेलाइट: भारत के अलावा सिर्फ 3 देश के पास यह क्षमता, पीएम मोदी ने...

अब तक विश्व के तीन देश ही यह डॉकिंग की तकनीक हासिल कर सके थे। यह देश अमेरिका, रूस और चीन हैं। 16 जनवरी, 2025 को भारत भी इस लीग में शामिल हो गया है।

तिरछी आँखें, चपटी नाक, लंबी खोपड़ी… इस्लाम के आने से पहले कुवैत में क्या था? खुदाई में मिली मिट्टी की 7000 साल पुरानी मूर्ति...

इस्लामी मुल्क कुवैत के पुरातत्वविदों ने 7,000 साल पुरानी ऐसी एक आकृति की खोज की है, जो आजकल के एलियन के जैसे दिखता है।

2100 जनजातीय छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप का प्रशिक्षण देगी मोदी सरकार, IISc को दिया गया बीड़ा: भारत में इस क्षेत्र में आने वाला है...

ट्राइबल कम्युनिटी के छात्रों को 'सेमीकंडक्टर फेब्रिकेशन एन्ड कैरेक्टराइजेशन' की ट्रेनिंग दी जाएगी। IISc स्थित 'सेंटर फॉर नैनो साइंस एन्ड इंजीनियरिंग' ये कार्यभार सँभालेगा।

ISRO की नई उपलब्धि, अब एक ही रॉकेट बार-बार उपयोग होगा, प्रयोग में पाई सफलता: फाइटर जेट की तरह उतरा RLV-LEX3

इसे रनवे से 4.5 किलोमीटर दूर हवा में छोड़ दिया गया था। इसके बाद यह स्वयं अपने सिस्टम चालू करके आटोमेटिक तरीके से रनवे पर लैंड कर गया।

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