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साहित्य

साहित्य अकादमी या वामपंथियों का वैचारिक अखाड़ा? ममता कालिया को ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए मिले पुरस्कार से छिड़ी बहस

साहित्य अकादमी 2025 में ममता कालिया को मिले सम्मान के बाद वामपंथी पक्षपात, स्वायत्तता और चयन प्रक्रिया पर नई बहस छिड़ गई है।

रोहतक से दिल्ली की ओर: परफॉर्मिंग आर्ट्स में हरियाणा का नया केंद्र बन रहा सुपवा

मोदी सरकार के साथ ही 2014 में अस्तित्व में आया यह संस्थान 'कला साधना परम दैवतम्' के ध्येय वाक्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

नेहरू की किस मानसिकता के कारण भारत को चीन से मिली पराजय, कॉन्ग्रेस शासन की विफलता की साहित्यिक समीक्षा

नेहरू अपने अनुयायियों के साथ मिलकर अपनी देवताओं की छवि गढ़ने का प्रयास कर रहे थे। सभी की चुप्पी में नेहरू का डर था लेकिन दिनकर नहीं डरे।

रायपुर साहित्य उत्सव: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा और राष्ट्रीय संवाद का अनुपम संगम

राजधानी रायपुर में पुरखौती मुक्तांगन परिसर में 23-25 जनवरी तक आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 एक ऐतिहासिक और अत्यंत सफल आयोजन साबित हुआ।

असम में ‘जिहादी साहित्य’ पर स्ट्राइक, बांग्लादेशी आतंकी संगठनों का डिजिटल कंटेंट भी बैन: जानें- कैसी किताबों के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश करते हैं...

असम सरकार ने जिन जिहादी साहित्यों पर बैन लगाया है, वे बांग्ला आतंकी संगठन डिजिटल रूप से युवाओं का ब्रेनवॉश कर कट्टरपंथी विचारधार फैलाते थे।

महाराष्ट्र में वोटबैंक के लिए मराठी vs हिंदी विवाद भड़काने की सियासत: ‘नॉर्थ इंडियन’ हिंदी का विरोध, लेकिन ‘फॉरेन मिक्स्ड नॉर्थ इंडियन’ से प्यार,...

उर्दू और हिंदी दोनों उत्तर भारतीय भाषाएँ हैं। उर्दू मुगलों के समय प्रशासनिक भाषा थी। उर्दू की लिपि नस्तालिक विदेशी, लेकिन व्याकरण हिंदी का है।

डकैत-लुटेरे हैं मंदिर के पुजारी-पंडे: गोवा के लेखक ने ‘घृणा’ फैलाकर दिखाई अपनी नास्तिकता, FIR दर्ज होने पर कहा- कार्रवाई से डरता नहीं

साहित्य अकादमी विजेता लेखक दत्ता दामोदर नाइक ने इस पूरे विवाद पर कहा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और किसी भी कार्रवाई से डरते नहीं।

400 से अधिक किताबें लिखीं, 80 करोड़ की संपत्ति: वाराणसी के साहित्यकार का वृद्धाश्रम में निधन, मुखाग्नि देने भी नहीं आए प्रोफेशनल बेटा-बेटी, दूसरे...

जीवन के अंतिम दिनों में श्रीनाथ खंडेलवाल नरसिंह पुराण का अनुवाद पूरा करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह अंतिम इच्छा अधूरी रह गई।

रामभद्राचार्य और गुलजार को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’: 100+ पुस्तकें लिख चुके हैं ‘तुलसी पीठ’ के संस्थापक, 68 साल से लिख रहे हैं संपूर्ण सिंह कालरा

12वीं में फेल हो चुके गुलजार की साहित्य में गहरी रुचि थी। वहीं रामभद्राचार्य की आँखों की रोशनी उनके जन्म के 2 महीने बाद ही चली गई थी।

31 साल की सजा भुगत रही ईरान की नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार: जिस लेखक ने एक वाक्य में लिख डाला उपन्यास, उसे...

नॉर्वे के जॉन फॉसे को लेकर कहा जाता है कि वो जिंदगी लिखते हैं। औरतों के हक की वकालत में ईरान में 2010 से लगातार नरगिस मोहम्मदी जेल जाती रहीं।

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