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रोहतक से दिल्ली की ओर: परफॉर्मिंग आर्ट्स में हरियाणा का नया केंद्र बन रहा सुपवा

अभिनेत्री मेघना मलिक ने कहा, "पहले अभिनय के लिए सिर्फ एनएसडी का नाम था, लेकिन अब सुपवा आपके शहर में है-इससे खूबसूरत क्या हो सकता है?"

दिल्ली के भगवान दास रोड पर स्थित राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) लंबे समय से परफॉर्मिंग और विजुअल आर्ट्स का एक मजबूत केंद्र रहा है, जो दूर-दूर तक अपनी छाप छोड़ता आया है। लेकिन अब हरियाणा के रोहतक में स्थित दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसी सुपवा) तेजी से उभर रहा है। इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से मात्र 85 किलोमीटर दूर यह विश्वविद्यालय कला के क्षेत्र में नई उम्मीदों की किरण बनकर सामने आया है। मोदी सरकार के साथ ही 2014 में अस्तित्व में आया यह संस्थान ‘कला साधना परम दैवतम्’ के ध्येय वाक्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

36 एकड़ के विशाल परिसर को प्रसिद्ध आर्किटेक्ट राज रेवाल ने डिजाइन किया है, जिसमें करीब 300 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक चुनौतियों, संकाय की कमी और उपकरणों की अपर्याप्तता के कारण विश्वविद्यालय को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फिल्म और टेलीविजन विभाग में देरी से कई बैच प्रभावित हुए- उदाहरण के लिए, 2017-2021 बैच ने 2024 में डिग्री पूरी की, जबकि 2018-2022 बैच को 2025 या 2026 तक इंतजार करना पड़ा। छात्रों के विरोध प्रदर्शन भी हुए, जो 2016 से 2023 तक विभिन्न रूपों में जारी रहे और 2024 में दो महीने से अधिक चला। इन सबके बावजूद संस्थान में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

साल 2025 में डॉ. अमित आर्य के छठे कुलपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सुपवा में सकारात्मक बदलावों की बयार बहने लगी। एक जाने-माने पत्रकार और मीडिया विशेषज्ञ डॉ. आर्य ने नेतृत्व संभालते ही पुरानी कमियों को दूर करने और संस्थान को नई दिशा देने का संकल्प लिया। अप्रैल 2025 में हरियाणा सरकार ने सुपवा को राज्य की सभी यूनिवर्सिटीज में फिल्म मेकिंग कोर्स शुरू करने के लिए मेंटर बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। साथ ही पंचकूला में हएमटी कालका की 100 एकड़ सरकारी जमीन पर फिल्म सिटी और गुरुग्राम में एक और फिल्म सिटी के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। ये कदम हरियाणा में परफॉर्मिंग और विजुअल आर्ट्स के परिदृश्य को बदलने वाले साबित हो रहे हैं।

डॉ. आर्य ने सबसे पहले विश्वविद्यालय के पारंपरिक महोत्सव ‘सारंग’ को पुनर्जीवित करने का फैसला किया, जो कई वर्षों से बंद पड़ा था। उनके नेतृत्व में ‘सारंग’ को एनएसडी के भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के साथ जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर लाया गया। फरवरी 2026 में आयोजित चार दिवसीय ‘भारंगम’ (भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण का हिस्सा) और ‘सारंग’ महोत्सव ने सुपवा को नई पहचान दी। महोत्सव की सफलता की गूँज दिल्ली-एनसीआर तक पहुँची, जिस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने शुभकामनाएँ भेजीं और भविष्य में किसी आयोजन में शामिल होने की इच्छा जताई।

महोत्सव की शुरुआत प्रभु वंदना से हुई, जिसमें असम के शास्त्रीय नृत्य सत्रिया के माध्यम से कृष्ण की लीलाओं का सुंदर चित्रण किया गया। दिल्ली के पार्थ हजारिका ग्रुप ने ‘सत्त्रिया की आत्मा’ प्रस्तुत की, जिसमें चेहरे के भाव, हाथों की मुद्राएँ और शरीर की अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुधीर रेखरी के बैंड ने विविध गीतों की धुनों पर सभी को झूमने पर मजबूर किया। महोत्सव में रंगमंच, संगीत, नृत्य, कविता पाठ, लोक नृत्य और संवाद सत्रों का सिलसिला चला। सुपवा के 50 छात्रों ने कथक, भरतनाट्यम, भंगड़ा, कव्वाली और बॉडी मूवमेंट थियेटर जैसी प्रस्तुतियाँ दीं।

एनएसडी की ओर से आयोजित ‘भारंगम’ में दिल्ली, पंजाब और श्रीलंका से चार नाटकों का मंचन हुआ। 107 एनएसडी सदस्यों (कलाकार, टेक्निशियन, म्यूजिशियन) ने भाग लिया। श्रीलंका के अपूर्वा थिएटर ग्रुप का नाटक ‘कोलम्बा हाथे थोराना’ विशेष आकर्षण रहा। सिंहली भाषा में मंचित इस दो घंटे के प्रयोगात्मक नाटक में प्रेम, विवाह और संघर्ष के तीन भागों में इंसानी रिश्तों की नाजुकता को दर्शाया गया। प्रोजेक्टर पर सबटाइटल्स की मदद से भाषा की बाधा दूर हुई, लेकिन कलाकारों के अभिनय ने भाषा को पीछे छोड़ दिया। नाटक में निपुनी शारदा, थिलीनी जयमाली सहित आठ कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन किया।

समापन समारोह में पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अवधी गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा, “सुपवा की धरती पर कुलपति डॉ. अमित आर्य ने कला का बीज बोया है और उसकी बागवानी व रखवाली की है। यहां आकर ऐसा लगा जैसे एनएसडी पहुँच गई हूँ।” उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-विवाह के दौरान महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले गीतों में सहज अभिनय का उदाहरण दिया और छात्रों को अपनी अभिव्यक्ति को खुलकर सामने लाने की प्रेरणा दी।

‘नखरे वाली बन्नो आई पिया’ गीत पर अभिनेत्री मेघना मलिक भी उनके साथ नाचने को मजबूर हुईं। छात्र छात्राओं का जैसा समर्थन इस प्रदर्शन को मिला, इसे चार दिनों की सबसे सफल प्रस्तुति कही जा सकती है। जहाँ कलाकार के साथ साथ दर्शक दीर्घा में मौजूद पूरा जेन-जी समूह झूम रहा था।

अभिनेत्री मेघना मलिक ने कहा, “पहले अभिनय के लिए सिर्फ एनएसडी का नाम था, लेकिन अब सुपवा आपके शहर में है-इससे खूबसूरत क्या हो सकता है?” क्राइम रिपोर्टर श्रीवर्धन त्रिवेदी ने रंगमंच को संपूर्ण विद्या बताते हुए ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर जोर दिया। अभिनेता विक्रम कोचर ने फैसले लेने की अहमियत पर प्रकाश डाला।

करीब 60 वॉलंटियर्स और पूरे सुपवा परिवार ने महोत्सव को सफल बनाया। डॉ. आर्य के नेतृत्व में तैयार रोडमैप के तहत भविष्य में ऐसे बड़े आयोजन नियमित होंगे। सुपवा अब एनएसडी जैसा विकल्प बन रहा है, जहाँ युवा कलाकारों को नई संभावनाएँ मिल रही हैं। हरियाणा में कला का नया अध्याय लिखा जा रहा है-उम्मीदों से भरा, ऊर्जा से लबरेज और सफलता की ओर अग्रसर।

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आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं।

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