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हिंदू मंदिर देश की धरोहर

सनातन और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम: शक्तिपीठों में से एक दंतेश्वरी माता मंदिर, जिसके नाम से प्रसिद्ध हुआ एक जिला

होली से पहले दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी माता मंदिर में नौ दिवसीय फाल्गुन मड़ई नामक त्यौहार का आयोजन होता है। इस त्यौहार के दौरान हर दिन माता दंतेश्वरी की डोली लगभग 250 देवी-देवताओं के साथ नगर भ्रमण पर निकलती हैं।

पलनि का मुरुगन स्वामी मंदिर: 9 बेहद जहरीले पदार्थों से बनी मूर्ति, जहाँ पूजे जाते हैं भगवान के साथ आयुर्वेद के ज्ञाता भी

अरुल्मिगु दंडायुधपाणी मंदिर भगवान शिव के पुत्र भगवान मुरुगन अथवा कार्तिकेय को समर्पित है, यह उनका सबसे प्रसिद्ध एवं सबसे विशाल मंदिर।

कैलाश मंदिर: आज भी इंजीनियरों को चौंकाती है, औरंगजेब कई जतन के बाद भी नहीं कर सका नुकसान

महाराष्ट्र के औरंगाबाद की एलोरा की गुफाओं में स्थित है कैलाश मंदिर। इसे मात्र एक चट्टान को काट और तराशकर बनाया गया है।

विष्णुपद मंदिर: जहाँ हैं भगवान के पदचिह्नों वाली धर्मशिला, जाने क्यों गया में पिंडदान से पितरों को मिलती है मुक्ति

गया में पिंडदान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। यहीं स्थित है अतिप्राचीन विष्णुपद मंदिर।

14वीं सदी का प्राचीन शिव मंदिर जो जलमग्न हो गया था दशकों पहले, आया बाहर: पूजा के लिए भक्तों का ताँता

ओडिशा के मलकानगिरि जिले के दमगुडा गाँव में 60 साल तक पानी में डूबे रहने के बाद प्राचीन शिव मंदिर पानी के बाहर आ गया है। 14वीं सदी का मंदिर...

मुरुदेश्वर मंदिर: विश्व का सबसे ऊँचा गोपुरम, 123 फुट ऊँची भगवान शिव की प्रतिमा… टीपू सुल्तान के अब्बा ने जिसे लूटा था

मुरुदेश्वर मंदिर कंडुका पहाड़ी पर स्थित है, 3 ओर से अरब सागर से घिरा हुआ है। मंदिर परिसर में स्थित ‘राज गोपुरा’ विश्व का सबसे ऊँचा गोपुरा है।

इस्लामी आक्रान्ताओं ने लूटा, भूकंप से हुआ तबाह… कांगड़ा में माता ब्रजेश्वरी मंदिर का वैभव फिर भी नहीं हुआ कम

गजनवी ने माता ब्रजेश्वरी देवी के इस मंदिर को 5 बार लूटा और नष्ट किया। मोहम्मद बिन तुगलक और सिकंदर लोधी ने भी इस मंदिर को लूटा और...

चित्रकूट का पर्वत जो श्री राम के वरदान से बना कामदगिरि, यहाँ विराजमान कामतानाथ करते हैं भक्तों की हर इच्छा पूरी

भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान लगभग 11 वर्ष मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित चित्रकूट में गुजारे। चित्रकूट एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है...

सीढ़ियों पर चलने से संगीत की ध्वनि… आस्था और रहस्य का अद्भुत मेल: कुंभकोणम का 800 साल पुराना ऐरावतेश्वर मंदिर

‘द ग्रेट लिविंग टेंपल्स’ में से एक है ऐरावतेश्वर मंदिर। 12वीं शताब्दी में राजराजा चोल द्वितीय द्वारा बनवाया गया यह मंदिर तमिलनाडु के...

खीर भवानी माता मंदिर: शुभ-अशुभ से पहले बदल जाता है कुंड के जल का रंग, अनुच्छेद-370 पर दिया था खुशहाली का संकेत

हनुमान जी लंका से माता खीर भवानी की प्रतिमा को ले आए और उन्हें जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से 14 किमी दूर तुलमुल गाँव में स्थापित कर दिया।

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