लोकसभा चुनाव में मिली हार के और बसपा अध्यक्ष के गठबंधन तोड़ने के बाद से अखिलेश यादव के सामने अपनी पार्टी को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। हाल ही में कई राज्यसभा सदस्य सपा छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
फिरोज खान ने शेरवानी पहनी, चेहरा फूलों के सेहरे से ढका और दूल्हे का रूप बनाकर गाड़ी में बैठ गए। उनके साथ गाड़ियों में बराती बन कर अन्य कार्यकर्ता भी बैठ गए और पुलिस को धोखा देकर रामपुर पहुँच गए।
रामपुर के डीएम ने बताया कि अखिलेश यादव की तरफ से धरने की अनुमति नहीं माँगी गई थी। फिलहाल यहाँ पर धारा 144 लागू है। 50 से अधिक लोग गाँधी समाधि के पास इकट्ठा नहीं हो सकते हैं। यह नियम सभी पर लागू होता है, अखिलेश यादव पर भी।
कॉन्ग्रेस नेता ने कहा है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सपा, आजम खान के बहाने पूरे प्रदेश में दंगा कराना चाहती है। ऐसे में अगर अखिलेश यादव रामपुर आते हैं तो वह पीड़ित परिवारों के साथ उनका विरोध करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष के पद को छोड़कर अखिलेश ने सभी के पद ख़त्म कर दिए हैं। पार्टी अब नए सिरे से लोगों को ज़िम्मेदारी सौंपने का काम करेगी। ऐसी संभावना जताई जा रही है जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
हत्या से जुड़े 10, सामूहिक बलात्कार के 4 और दंगों के 26 मामलों के आरोपितों को अदालत ने बेगुनाह माना। सरकारी वकील के हवाले से बताया गया है कि अदालत में गवाहों के मुकरने के बाद अब राज्य सरकार रिहा आरोपितों के संबंध में कोई अपील नहीं करेगी।
"मेरी नजर में अखिलेश यादव की कोई अहमियत नहीं रह गई है। राम गोविंद चौधरी ने सपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर करवा दिए लेकिन फिर भी अखिलेश ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की।"
आज तक ने अखिलेश यादव की भुट्टे का भाव पता करने की इस मार्मिक घटना को सनसनी बनाकर साबित कर दिया है कि मीडिया को अपने केजरीवाल तलाशने के लिए ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है। वर्तमान राजनीति केजरीवालों से भरी पड़ी है।
इस घोटाले के बारे में उन्हें तब मालूम चला था जब बीज निगम ने भुगतान के लिए अपना बिल कृषि विभाग के पास भेजा था। इस दौरान 99 लाख का फर्जी बिल पाया गया, जिसके बाद ही घोटाले की विभागीय जाँच शुरू हुई।
ऐसे समय में जब लोग अपनी ग़लती को सुधारने के लिए तैयार हैं और आगे की तरफ बढ़ रहे हैं, इस तरह की फ़िल्में जातिगत पहचान के पुराने ढकोसले को अपने गले से नीचे उतारने का एक बेशर्म प्रयास है, जिसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है।