वो 'अमर' है। वो'जीसस का दूत' है। 88 वर्षीय ली मैन ही के उस रहस्यमयी चर्च के कारण दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस के क़रीब 5000 मामले आए हैं। मिस्टर ली का कहना है कि शिनचेओंजी की तेज़ तरक्की से दुष्ट शक्तियाँ नाराज़ हैं। इस चर्च का एक ब्रांच वुहान में भी हैं।
टीजे जोसेफ उस प्रोफेसर का नाम है जो अपनी ही समुदाय का मारा है। बकौल जोसेफ, चर्च ने उनका साथ नहीं दिया। उन्हें आधिकारिक तौर पर बहिष्कृत कर दिया। उनकी पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग माँ को भी हाशिए पर खड़ा कर दिया।
मोशी शहर की एक चर्च। सामने खुला मैदान और वहाँ धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन। भीड़ खचाखच। तभी खुद को ईश्वर कहने वाले पादरी मवामपोसा ने कहा - जमीन पर 'पवित्र तेल' पड़ा हुआ है। बस, रोग ठीक होने की आस में सभी लोग तेल को छूने लगे। भगदड़ मची और...
'होली सेक्रामेंट' ईसाई धर्म की एक ऐसी प्रथा है, जिसमें गिरजाघरों में रोटी और शराब बाँटकर यीशु मसीह के 'लास्ट सपर' को स्मरण किया जाता है। लेकिन चर्च में पादरी हर सहभागी के मुँह में एक ही प्याली और चम्मच से शराब परोसते हैं। इसके कारण लार से होने वाली बीमारियाँ...
"केवल पुरुष ही इस चर्च में प्रवेश कर सकते हैं, महिलाओं को इस चर्च में प्रवेश की अनुमति नहीं है। हम इस निर्णय का सम्मान करते हैं। इसके पीछे आंशिक रूप से इमारतों की रक्षा करना है, साथ ही इस स्थान को पवित्र बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाता है।"
आरोप है कि इन लोगों ने ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबल की शब्दावली का मज़ाक उड़ाया। फराह ख़ान ने बाइबिल का एक शब्द बोला और भारती सिंह को ब्लैकबोर्ड पर लिखने को कहा। आरोप लगाया गया है कि शो में बाइबिल के शब्द को अश्लील रूप में पेश किया गया।
ऐसे कई और यौन शोषण की घटनाएँ हैं जो चर्च में पादरियों द्वारा अंजाम दी गई हैं। भारत में केरल का मामला तो चल ही रहा है। कहा जाता है पूरे विश्व में ऐसे अनगिनत मामले हैं जहाँ पादरियों ने न सिर्फ बच्चों बल्कि नन को भी नहीं बख्शा है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन का कहना है कि धर्मांतरण के अलावा 'चर्च प्लांटिंग' भी एक अहम मुद्दा है। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों से ज्यादा चर्च बना दिए गए हैं ताकि उसका प्रभाव दिखे।
वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, "ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।"
पीड़ित लड़कियों की शिकायत पर इन सभी आरोपितों को इसी साल 17 जून को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन एनजीओ की शिकायत पर सुनवाई के दौरान इन सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया।