उमा भारती, सिंधिया और विजयवर्गीय की गर्मजोशी से हुई मुलाक़ात भोपाल के गलियारों में चर्चा बटोर रही है। सिंधिया को लेकर कयासों का दौर अरसे से लग रहा है। बीच-बीच में उनके समर्थक प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को असहज करने वाले बयान भी देते रहते हैं।
“मैं गाँव का रहने वाला हूँ। मैं जब मदद करता हूँ तो मर्दानगी से करता हूँ। मैंने तो शाहीन बाग वालों की भी मदद कर रखी है। शाहीन बाग बाले मुझे रोज फोन करते हैं।”
सरकार के मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता असलम शेख ने कहा कि यह MVA के सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम का एक हिस्सा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिमों के लिए नौकरियों और प्रमोशन में आरक्षण शिवसेना के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के एजेंडे में है।
कॉन्ग्रेस नेता की भारत तोड़ने की इस टिप्पणी पर न्यूज एंकर और भाजपा प्रवक्ता ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता कि इस भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना की। इसके बाद ट्विटर यूजर ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या कॉन्ग्रेस सच में ‘जिन्ना वाली आजादी’ चाहती है।
"1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।"
धर्मनिरपेक्ष देश के एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की अदालत में गॉंधी की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई। ऐसा करने वाले ही गाँधी के नाम को भुनाने के फेर में लगे रहते हैं। तो क्या उनके लिए गॉंधी प्रतीक से ज्यादा कुछ भी नहीं?
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन का पैराग्राफ 18 पढ़ने से इनकार कर दिया। इस पैराग्राफ में सीएए को असंवैधानिक और भेदभाव करने वाला बताया गया था। सीएए के बारे में इस तरह की बातें लिखे जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई।
"नेता प्रतिपक्ष हम जैसे विधायकों की बदौलत इस पद पर हैं। हम उनके रहमोकरम पर नहीं हैं। 11 में से सात-आठ विधायक उन्हें पद से हटाने के लिए हाईकमान से बात करेंगे।"
इस तरह के नोटिस राजस्थान के लगभग हर कॉलेज में जारी किए गए हैं। साथ ही कॉलेजों को टारगेट दिया गया है कि हर क्लास से कम से कम 10 बच्चे राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली में आने ही चाहिए।
संबित पात्रा ने कहा कि सोनिया गाँधी के पिता तो मुसोलिनी और हिटलर जैसे तानाशाहों से जुड़े हुए थे, फिर उन्हें भारत की नागरिकता क्यों दी गई? संबित पात्रा के इन आरोपों का अब तक कॉन्ग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया है।