"दो दिन के बाद भी इस विषय पर सरकार और केरल के डीजीपी लोकनाथ बेहेरा जिन पर कैग रिपोर्ट में आरोप लगाए गए हैं ने पूरी तरह चुप्पी ओढ़ ली है। मुख्यमंत्री कहते हैं कि वे इस पर असेंबली में बयान देंगे, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
कमलनाथ-सिंधिया के बीच तल्खी बढ़ने की खबर सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए। बताया जा रहा है कि कमलनाथ के घर पर हुई इस बैठक में सिंधिया के साथ कई मुद्दों पर नोंकझोंक हुई। पूरे मामले से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भी अवगत कराया गया है।
पिछले वर्ष दिसंबर माह में मामले पर हुई सुनवाई को 15 फरवरी 2020 तक के लिए टाल दिया गया था। दिसंबर में भी कोर्ट ने थरूर को पाँच हजार रुपए की गारंटी जमा करने का निर्देश दिया था।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्य के किसानों से किए गए कर्जमाफी के वादे को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ सड़क पर उतरने की चेतावनी दी थी। इस बारे में जब सीएम कमलनाथ से सवाल किया गया तो उन्होंने दो टूक कहा- तो उतर जाएँ।
कल्पना के साथ पूर्व एमएलए लिव इन रिलेशन में थे। कल्पना उन पर शादी के लिए दबाव बना रही थी। शादी के बहाने उसे साईं मंदिर बुलाया और रॉड से उसके तथा उसकी बेटी के सिर पर वार किया। फिर दोनों के चेहरे को गाड़ी से कुचल दिया।
महाराष्ट्र के जिस कॉलेज में छात्राओं को यह बेतुकी शपथ दिलाई गई उसकी स्थापना कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राम मेघे ने की थी। एक वीडियो सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि एक पुरुष और कुछ महिला टीचर छात्राओं को लव मैरिज न करने की शपथ दिला रहे हैं।
महिला आईपीएस ने प्रदर्शनकारियों को समझाते हुए, कोई नुकसान न पहुँचाने और शांति पूर्ण प्रदर्शन करने की हिदायत दी। इसके बाद ही कॉन्ग्रेस की महिला विधायक शकुंतला साहू वहाँ पहुँची, और आईपीएस अधिकारी को, "ठीक से रहो वर्ना औकात दिखा दूँगी" की धमकी दी।
“टोटल कन्फ्यूजन! पी चिदंबरम चाहते हैं कि NPR का विरोध हो। इसके लिए उन्होंने जेएनयू के छात्रों को कुछ टिप्स दिए हैं। वहीं, महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक मई से 15 जून के बीच NPR कराने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र की सत्ता में कॉन्ग्रेस पार्टी शिवसेना की साझेदार है। क्या दिल्ली में कॉन्ग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी है?”
...अगर गृह मंत्रालय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो गाँधी परिवार को हवाई अड्डे की सुरक्षा से आम नागरिक की तरह गुजरना होगा और घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सवार होने के लिए अन्य यात्रियों के साथ कतार में खड़ा होना होगा।
गुप्त सूत्र बताते हैं कि दिल्ली चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस आलाकमान ने उच्चस्तरीय बैठक में सभी उम्मीदवारों को जमानत जब्त करवाने के निर्देश दिए थे। नतीजों के बाद जो तीन उम्मीदवार ऐसा नहीं कर पाए हैं अब वे पार्टी भी अपने भविष्य को लेकर सशंकित हैं।