उस समय विजय बहुगुणा के नेतृत्व में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी। उसी सरकार ने निर्णय लिया था कि एससी-एसटी को आरक्षण दिए बिना राज्य में सारे सार्वजनिक पदों को भरा जाएगा। आज जब सदन में सच्चाई बताई गई तो कॉन्ग्रेस सांसद वॉकआउट कर गए। राहुल गाँधी मोहन भागवत को दोष दे रहे।
“मुझे खुशी है कि भारत का बँटवारा हुआ क्योंकि अगर भारत का बँटवारा नहीं होता तो हमें कई 'डायरेक्ट एक्शन डेज' देखने पड़ते। ऐसी पहली कार्रवाई हमने जिन्ना के जीवित रहते 16 अगस्त 1946 को देखी थी, उस समय कलकत्ता में हजारों हिंदुओं को मार दिया गया था।"
तो क्या कॉन्ग्रेस पार्टी ने मान लिया है कि दिल्ली में उसका अस्तित्व खत्म है और राहुल गाँधी व प्रियंका गाँधी भी पार्टी को बचाने में कामयाब नहीं हुए? जो पार्टी 2013 तक लगातार 15 वर्षों में सत्ता में रही थी, अब वो अस्तित्व बचाने के लिए भी जूझ रही है।
राजनैतिक पंडितों के दावे तब भी आज की तरह ही AAP के हक में थे। आप ऐसे ही अति आत्मविश्वास में थी। तब भी वोटों की गिनती 11 तारीख को ही हुई थी। जब नतीजे आए तो सारे दावे, सारा यकीन रेत की महल की तरह ढह गया था।
अनिल अंबानी के सासन पॉवर प्रोजेक्ट पर सरकार का 450 करोड़ रुपए बकाया है। इसकी वसूली एक साल के अंदर करनी थी। लेकिन कमलनाथ सरकार ने इसकी मियाद चार साल कर दी है।
कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के मीडिया प्रभारी राजीव त्यागी ने उदित राज को लताड़ते हुए कहा कि ब्राह्मण होना पाप नहीं है। उन्होंने उदित राज को चुनौती देते हुए कहा कि वो इस विषय पर किसी के भी साथ बहस करने को तैयार हैं।
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ही संसद में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बारे में टिप्पणी की और रात में उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगा दिया गया। आप कश्मीर पर इस तरह राज नहीं कर सकते हैं। कश्मीर भौगोलिक तौर पर तो हमारा है लेकिन भावनात्मक रूप से नहीं।"
2015 में करीब 67% मतदान हुआ था। इस बार भी ऐसा हुआ तो एक करोड़ के करीब वोट पड़ेंगे। दिल्ली में इस वक्त भाजपा के सदस्यों की संख्या 62 लाख के करीब है। इन सभी ने बीजेपी के लिए वोट डाले तो 11 फरवरी को करिश्मा तय है।
कॉन्ग्रेस के एक सांसद हंगामा करते हुए सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति तक पहुँच गए और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को घेर लिया। सांसद मणिकम टैगोर आक्रामक ढंग से डॉ हर्षवर्धन के बहुत नजदीक आ गए। जिसके बाद लोकसभा में हाथापाई की नौबत तक आ गई।