प्रोफेसर सोमेन ने कहा था, “आप वास्तव में सावरकर नहीं हैं, आपके अंदर उनके कोई गुण मोजूद नहीं हैं। सच तो यह है कि आप एक सच्चे गाँधी ही नहीं हैं…।” इसके विरोध में NSUI के प्रदर्शन के बाद यूनिवर्सिटी ने उन्हें अवकाश पर जाने का आदेश दिया था।
"जय हिंद एक नारा था। इसका इस्तेमाल आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज में किया गया था। यह सभी धर्मों, सभी समुदायों, सभी जाति और पंथों को एक करता है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को 'जय हिंद' का उपयोग करना चाहिए।"
“मंत्री जी ने मुझे डाँटा और जेल में बंद करने को कहा। वो सरकार का हिस्सा हैं, उनसे उम्मीद है कि वो हमारी चिंताओं और मुद्दों को सुनें। मैं किसान कॉन्ग्रेस का राज्य महासचिव हूँ, इसके बाद भी वो मेरे साथ इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं।”
अरविन्द केजरीवाल ने लोगों को मुफ्त बिजली और पानी देने के बहाने साफ़ पानी, बिजली की निरंतरता, सस्ता इलाज और अच्छी शिक्षा जैसे कई अन्य बुनियादी जरूरतों की ओर ध्यान ही नहीं जाने दिया है। वहीं भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के एक मौके के इन्तजार में है।
धोखाधड़ी के इस मामले की सबसे पहली रिपोर्टिंग ऑपइंडिया ने अक्टूबर 2018 में की थी। सचिन उपाध्याय को उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जाँच कर रहे एक विशेष जाँच दल की रिपोर्ट के आधार उनके घर के बाहर से गिरफ्तार किया गया।
मामला 25 अगस्त 2015 का है। अहमदाबाद में एक रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद बसों, पुलिस चौकियों और अन्य सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया था। एक पुलिसकर्मी सहित करीब दर्जन भर लोग मारे गए थे।
कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी कहा है कि CAA लागू करने से राज्य इनकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया तो CAA क़ानून की किताब में क़ायम रहेगा। जो क़ानून की किताब में है उसे सभी को मानना होगा।
विधायक मुन्नालाल गोयल का कहना है कि पार्टी जिन वादों के सहारे सत्ता में आई उसे पूरा करने के लिए वे कई बार सीएम और मंत्रियों को पत्र लिख चुके हैं। बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ। मजबूरन, उन्हें धरने पर बैठना पड़ा।
गहलोत सरकार ने अब 100 हिंदू शरणार्थियों को रियायती दर पर जमीन देने का ऐलान किया है। इससे पहले उसने हिंदू शरणार्थियों को पाकिस्तान चले जाने को कहा था। हालॉंकि उसके इस आदेश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रोक लगा दी थी।
"इंदिरा गॉंधी हमारी नेता और आदर्श हैं। बीजेपी के साथ रहते हुए भी संजय राउत उनके खिलाफ टिप्पणियॉं करते थे। अब सरकार में होने के बाद भी वे इससे बाज नहीं आ रहे। यदि वे सोचते हैं कि हम चुपचाप सुनते रहेंगे तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं।"