राणा कपूर की तीन बेटियों की इस घोटाले में संदिग्ध भूमिका मानी जा रही है। लेकिन, एक बेटी ऐसी भी है जिसका मानना है कि उसके पिता होते तो यस बैंक का यह हाल न होता। जानें, शगुन कपूर का क्या है इस बैंक से रिश्ता?
उस पेंटिंग में ऐसा क्या था कि मिलिंद देवड़ा चाहते थे कि 'यस बैंक' के तत्कालीन सीईओ राणा कपूर उसे प्रियंका गाँधी से 2 करोड़ रुपए में ख़रीदें? उस दौरान मिलिंद, राणा और प्रियंका में क्या-क्या बातचीत हुई, उसकी पूरी डिटेल्स यहाँ देखें। बदले में राणा ने भी एक बड़ी माँग रखी थी।
'लुक आउट नोटिस' को नज़रअंदाज़ कर लंदन भागने की कोशिश करने वाली रौशनी ने ईडी और सीबीआई का शक और गहरा कर दिया कि दाल में ज़रूर कुछ काला है। रौशनी को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रोका गया। 'यस बैंक' से लोन दिलाने के एवज में भारी रक़म वसूली जाती थी।
'यस बैंक' के संस्थापक की तीनों बेटियों पर आरोप है कि उनके नाम से कई कम्पनियाँ चलती हैं, जो दूसरी कंपनियों को 'यस बैंक' से लोन दिलाने के एवज में मोटी रकम वसूलती थीं। तलाशी अभियान के बाद मिले दस्तावेजों के आधार पर राणा कपूर के ख़िलाफ़ एक और अलग मामला दर्ज...
जब यादव सिंह चीफ इंजीनियर थे, तब कुल 116.39 करोड़ का टेंडर 5 प्राइवेट फर्म्स को जारी हआ था। CBI का आरोप है कि गुल इंजीनियरिंग के मालिक जावेद अहमद, यादव सिंह के पुराने और करीबी दोस्त हैं। इस कंपनी को नियमों का उल्लंघन करके टेंडर दिया गया था।
माधव से पूछताछ की जा रही है कि वो किसके कहने पर रुपए लेता था और उस रकम को कैसे और कहाँ आगे बढ़ाया जा रहा था। सीबीआई ने माधव के अनेक ठिकानों पर छापेमारी की है और अब तक वहाँ से नगदी समेत कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
सीबीआई की चार्जशीट में बताया गया है कि रिश्वत की बात पेड़, गमला, समान और प्रसाद जैसे कोड वर्ड के जरिए की गई। हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोड वर्ड 'मंदिर' था। हवाला लेन-देन के लिए 'दस रुपए का नोट' कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया।
शर्त जो कोर्ट ने चिदंबरम के बेल के लिए रखी थी, वो है - (i) इस संबंध (केस) में प्रेस को ब्रीफ नहीं करेंगे। (ii) मामले से जुड़े गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। (iii) कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नहीं जा सकते (iv) 2 लाख रुपए का निजी मुचलका भरना होगा।
अदालत ने कहा है कि बाहर निकलने के बाद चिदंबरम गवाहों से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। कोर्ट की इजाजत के बगैर विदेश नहीं जाएँगे। इस मामले को लेकर मीडिया से बात करने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
इस मामले में कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को समन भेजा गया था। उन्हें 4 नवंबर को आईटी विभाग के समक्ष पेश होने को कहा गया था। इन नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। ये पूरा का पूरा मामला हवाला लेन-देन से जुड़ा है।