तिहाड़ जेल प्रशासन कोई रिस्क नहीं लेना चाहता, क्योंकि संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल को फाँसी पर लटकाने से पहले भी उसके वजन की डमी को फाँसी देकर ट्रायल किया गया था। उस ट्रायल में रस्सी टूट गई थी। चूँकि इस बार मामला चार कैदियों का है, इसी वजह से...
मृतक लड़की लगभग 6 महीने पहले यूपी के जौनपुर से शहर आई थी और भांडुप में जॉब कर रही थी। यहाँ उसे मुस्लिम समुदाय के एक सहकर्मी से प्यार हो गया और वह उससे शादी करना चाहती थी। मगर उसके पिता को यह मंजूर नहीं था। इसी बात को लेकर...
उसने कलेक्टर से लेकर आईजी तक सबके पास फरियाद लगाई। लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। नतीजतन, लड़कों के हौसले बुलंद हो गए। डर से छात्रा के परिजन घर से नहीं निकल रहे। लड़की की पढ़ाई छूट गई। लेकिन, प्रताड़ना का सिलसिला नहीं रुका।
अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?
परिवार का आरोप है कि आरोपित शख्स ने घर में घुसकर पीड़िता के साथ रेप का प्रयास किया था लेकिन पीड़िता के विरोध के बाद जब वह नाकाम रहा तो उसने केरोसिन तेल छिड़कर पीड़िता को जिंदा जलाने की कोशिश की। पीड़िता 80 फीसदी जल चुकी हैं।
पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उसे 'माँस के टुकड़े' की तरह हाथोंहाथ बेचा गया। आरोपितों ने उसके साथ बलात्कार किया। उससे जबरन 'मनपसंद सेक्स एक्ट्स' परफॉर्म करवाए, ओरल सेक्स किया और फिर उसके शरीर पर पेशाब कर दिया। उसे बार-बार बेचा गया।
सेंधमारी के लिए ऐसे घरों का चयन किया जाता था, जो काफ़ी समय से बंद हों और वहाँ कोई रहता न हो। इसके बाद आरोपित उस घर में सेंधमारी करने जाते थे तो अच्छे कपड़े पहनकर जाते थे, जिससे पड़ोसियों को लगे कि वो उस घर के सदस्यों के कोई रिश्तेदार हों।
"मैं इसीलिए बयान नहीं देती ताकि लोग तालियाँ बजाएँ। तुम्हारे विचार प्रकट कर देने भर से बलात्कारियों के मन में ख़ौफ़ नहीं बैठ जाएगा। हैदराबाद पुलिस ने जो किया, एकदम सही किया। मैं डॉक्टर रेड्डी के दर्द के बारे में सोच भी नहीं सकती लेकिन इस एनकाउंटर से मैं ख़ुश हूँ।"
माँगों को माने जाने के बाद परिवार पीड़िता का अंतिम संस्कार करने पर राज़ी हो गया। परिवार के पास पहले से जो मकान है, उसे पक्का किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एक और घर दिया जाएगा। पीड़िता की बहन को सुरक्षा देने के आलावा घर पर भी 24 घंटे सुरक्षा दी जाएगी।
"रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक महिलाएँ किसी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकती हैं। पुलिस उन्हें पिक कर लेगी और उन्हें उनके निर्धारित स्थानों तक सुरक्षित पहुँचाएगी।"