विषय

Delhi Elections

‘आत्मा’ से बात कर के ‘The Wire’ के संस्थापक ने कहा- केजरीवाल को 3% अतिरिक्त वोट मिले

लोगों ने एमके वेणु से पूछा कि क्या उन्होंने किसी पूर्व सीएम की आत्मा से बात कर के अरविन्द केजरीवाल की तारीफ कर दी? हालाँकि, 'द वायर' इन्हीं कारणों से जाना जाता है। भाजपा के विरोध में हवा बनाने के लिए वो कुछ भी कर सकता है। दिल्ली का कोई पूर्व सीएम जिन्दा ही नहीं हैं।

मुस्लिम बाहुल्य या रिजर्व सीटों पर पड़े सबसे ज्यादा वोट, AAP के लिए हुई एकतरफ़ा वोटिंग!

अल्पसंख्यकों और रिजर्व सीटों पर अधिक वोटिंग को सीधे तौर पर चुनाव विश्लेषक आम आदमी पार्टी के लिए फायदे का सौदा बता रहे हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम सीटों का वोटर एकतरफ वोट करता है। अभी तक का आँकलन यही बता रहा है कि मुस्लिम वोटर्स AAP की तरफ गया है।

32.25% वोटरों की राय को किया गया नज़र-अंदाज़: दिल्ली Exit Polls में बड़ी गड़बड़ी?

जैसा कि आज के दौर में हम देखते हैं, टीवी न्यूज़ चैनलों के बीच किसी भी ख़बर को पहले दिखाने के लिए बड़ी प्रतिस्पर्द्धा चलती है और इसके लिए वो हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लाजिमी है, पहले एग्जिट पोल्स के डेटा दिखाने के लिए भी उनमें होड़ मची होगी। ऐसे में जल्दबाजी में गड़बड़ी हुई होगी।

कागज बचाकर रखना, NPR में दिखाने पड़ेंगे: मुस्लिम महिला वोटरों पर BJP की चुटकी

शाहीन बाग सहित पूरी दिल्ली में लोगों ने पहचान पत्र दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने चुटकी ली कि जो लोग कागज दिखाने से इनकार करते हैं आज वह पहचान पत्र लेकर लाइन में लगे हैं।

Exit Polls के बाद शाह-नड्डा ने की पार्टी नेताओं के साथ बैठक, AAP का ईवीएम राग शुरू

एग्जिट पोल्स के बाद आप ने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इस संबंध में केजरीवाल के घर पर एक बैठक हुई। इसमें मनीष सिसोदिया और प्रशांत किशोर भी मौजूद थे।

जब जश्न मनाने की AAP की तैयारियाँ धरी रह गई… इसलिए Exit Polls को झुठला सकती है BJP

राजनैतिक पंडितों के दावे तब भी आज की तरह ही AAP के हक में थे। आप ऐसे ही अति आत्मविश्वास में थी। तब भी वोटों की गिनती 11 तारीख को ही हुई थी। जब नतीजे आए तो सारे दावे, सारा यकीन रेत की महल की तरह ढह गया था।

2015 नहीं, 1998 की याद दिला रही दिल्ली की जनता, AAP के लिए खतरे की घंटी!

दिल्ली में 2013 और फिर 2015 में मतदान का नया रिकॉर्ड बना। दोनों ही बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। सबसे कम वोटिंग 1998 में हुई थी, जब दिल्ली की सत्ता बीजेपी के हाथ से निकल कर कॉन्ग्रेस के पास चली गई थी।

सत्ता के लिए कागज़ दिखाएँगे वरना ‘कागज बकरी खा गई, बकरी अब्बा खा गए’ चिल्लाएँगे

भला हो मोदी, LG, हाशमी दवाखाना और हर उस आदमी का जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को कभी कुछ करने ही नहीं दिया, वरना शाहीन बाग़ वालों को लंदन में बिरियानी के लिए लंगर लगाने और धरना प्रदर्शन करने की इजाजत ही कैसे मिल पाती, क्योंकि लंदन में तो हर काम के लिए कागज दिखाने पड़ते हैं और शाहीन बाग़ वालों के कागज़ तो कब की बकरी खा गई थी।

98 से आगे निकली दिल्ली की जनता, Exit Poll में AAP आगे, कॉन्ग्रेस के फिर से 0 पर सिमटने के आसार

पिछली बार की तुलना में भाजपा की सीटों में काफी इजाफा होता दिख रहा है। लेकिन एग्जिट पोल की माने तो वह सरकार बनाने में कामयाब नहीं रहेगी। आप को आसानी से बहुमत मिलता दिख रहा है।

आप हमें कमअक्ल समझें, लेकिन हम ही बैंड बजाएँगे AAP की: यह ट्वीट आपको बहुत भारी पड़ेगा केजरीवाल

यहाँ पर सवाल उठता है कि केजरीवाल ने ऐसा क्यों कहा कि वोट देने से पहले पुरुषों से अवश्य चर्चा करें? क्या उनको आज की नारी पर भरोसा नहीं है? क्या वो पढ़ी-लिखी-समझदार नहीं है? क्या वो भला-बुरा देखकर समझ नहीं सकती? क्या महिलाओं में इतनी समझदारी नहीं है कि वो अपनी समझ से वोट दे सकें?

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें