"जो लोग क्लास अटेंड करना चाहते हैं, वो असंवेदनशील हैं। मैं एक मुस्लिम होकर यात्रा करने या बाहर निकलने में सुरक्षित महसूस नहीं करती हूँ। जिस दिन ये सब आप लोगों के साथ होगा, उस दिन पता चलेगा।"
एक तरफ अघोषित नीति के तहत फेल होने वाले बच्चों का एडमिशन नहीं लिया जाता। दूसरी तरफ कहानियॉं सुनाकर उनको खुश दिखाने का प्रोपेगेंडा रचा जा रहा है। पर दुर्भाग्य से यह कसरत भी आधी-अधूरी ही है।
सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद इंडोनेशिया की संस्कृति में रामायण रची-बसी है। यहॉं की रामलीला दुनियाभर में प्रसिद्ध है। कुछ दिनों यहॉं हिंदू यूनिवर्सिटी की शुरुआत की गई है।
कॉलेज में 'आज़ादी' से जुड़े कई पोस्टर चस्पा मिल जाएँगे। जम्मू कश्मीर की 'आज़ादी' को लेकर भी कई पोस्टर लगाए गए हैं। कॉलेज के कार्यक्रमों का इस्तेमाल सीएए को लेकर भ्रम फैलाने के लिए किया जा रहा है। जम्मू कश्मीर पर 'कब्जा' और तालाबंदी होने की बात कही गई है।
THE के CKO ने बताया कि विभिन्न प्रयासों के कारण भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में उछाल आया है और उच्च-शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है। उन्होंने 2017 में स्थापित 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस स्कीम' की भी तारीफ की, जिसके तहत भारत में शैक्षिक संस्थानों की रैंकिंग की जाती है।
इन 2 शिक्षकों के खिलाफ कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया ने प्रदर्शन किया। इसी संगठन ने ऊँ और माता सरस्वती की तस्वीर पर आपत्ति जताते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई करने के लिए स्कूल के अधिकारियों पर दबाव बनाया। कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया का मूल संगठन इस्लामी कट्टरपंथी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) है।
रवीश को ये भी बताना था कि दिल्ली की पूरी जीडीपी का कितना प्रतिशत शिक्षा को जा रहा है। वो बताएँगे तो पता चल जाएगा कि यह 2 प्रतिशत से कम है, लेकिन रवीश यह नहीं बताएँगे।
देश में एक ऐसा प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है, जहाँ वामपंथियों ने JNU से भी ज़्यादा तबाही मचा रखी है। निर्भया का बलात्कारियों के समर्थन से लेकर सेना को बलात्कारी और हिंसक बता तक, वहाँ के वामपंथी छात्र और प्रोफेसर घृणा की नई इबारत लिख रहे हैं। TISS में वामपंथियों की साज़िश का भंडाफोड़।
मुस्लिम बहुल होने के बावजूद इंडोनेशिया की संस्कृति में रामायण रची-बसी है। यहॉं की रामलीला दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ताजा रेगुलेशन का मकसद हिंदू उच्च शिक्षा को समर्थन और बढ़ावा देना है।
विवाद को देखते हुए कॉलेज ने बुर्का से जुड़ा निर्देश वापस ले लिया है। कॉलेज ने पहले ड्रेस कोड में आने का निर्देश देते हुए कहा था कि परिसर और क्लासरूम में बुर्का का प्रयोग वर्जित है। इसको लेकर कुछ छात्राओं ने आपत्ति जताई थी।