सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ब्लैक हुडी पहने एक शख्स हाथ में क्रिकेट बैट या फिर हॉकी स्टिक लेकर आता है और उन मूर्तियों पर भयानक तरीके से प्रहार करता है।
दिल्ली के चांदनी चौक में मंदिर तोड़-फोड़ अपने-आप में अनोखी घटना हुई हो, ऐसा नहीं है। मंदिरों को तोड़ने, उत्पात मचाने और हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने की घटनाएँ हर सप्ताह घटित होती हैं। हालाँकि वामी मीडिया इसे अपने प्रोपेगेंडा के कारण दबा देती है। इसलिए जून 2019 से लेकर अब तक की 10 ऐसी घटनाएँ आपके लिए...
वसीम ने कहा, " इस मंदिर को जड़ से उखाड़ दो, जब मंदिर ही नहीं बचेगा तो विवाद खत्म हो जाएगा।" उस पर यह भी आरोप है कि उसने वहाँ बचे-खुचे एक-दो घरों में बसे हिंदुओं को भी भगा देने और घर पर कब्जा कर लेने की भी ललकार लगाई।
दंगाई भीड़ ने हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं और आम लोगों की पिटाई कर दी। यहाँ तक कि बच्चों को भी नहीं बख़्शा गया। हिन्दू समुदाय के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
पार्किंग को लेकर हुई एक मामूली सी तक़रार झगड़े में तब्दील हो गई। उसके बाद दोनों समुदायों में जमकर पत्थरबाज़ी हुई। यह मामला यहीं नहीं थमा, उस रात, मुस्लिम भीड़ ने मंदिर में घुसकर प्रतिमाओं को तोड़ा और अल्लाहु अकबर के नारे लगाए।
बिना एसडीओ की इजाज़त के जनाक्रोश सभा का आयोजन भी किया गया और कई मुस्लिम संगठनों के लोग इसमें शामिल हुए। धीरे-धीरे लोगों की भीड़ जुलूस में बदल गई। फिर जो हुआ उसने सभी सीमाएँ पार कर दी। इस मामले में एजाज़ गद्दी, मौलाना ओबेदुल्लाह कासमी, शमशेर आलम समेत कई अन्य पर FIR दर्ज किया गया है।
सोशल मीडिया पर अविरल की गिरफ़्तारी पर विवाद बढ़ने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने ट्वीट के माध्यम से सूचना दी कि मंदिर में हनुमान चालीसा आज ही तय समय पर की जाएगी।
प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के ख़िलाफ़ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज की। इसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लिया।
उग्र मुस्लिमों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कम से कम 8 आँसू गैस के गोले दागने पड़े, क्योंकि समुदाय विशेष ने प्रदर्शन के दौरान पथराव और आगजनी करना शुरू कर दिया। जिससे 4 से 5 पुलिस कर्मी घायल हो गए और बस सहित कई वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया।
एसपी साउथ रवीना त्यागी ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला कि पीड़ित और आरोपित एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। उसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ और फिर मारपीट हुई। जय श्री राम के नारे लगवाने के विरोध में पीटने की बात गलत है।