कई लोग अगस्त में ही दीपावली मानाने की तैयारी में भी दिखते हैं। वैसे इससे हमें दूसरा वाला नारा - काशी-मथुरा बाकी है, याद आ जाता है, मगर उससे दीयों के बजाए कुछ और ही जलने लगेगा! नहीं?
ताहिर हुसैन ने इंसानों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। हुसैन ने खुद ही कबूला कि उसी ने मुस्लिम भीड़ को भड़काया था और चाँदबाग, खजूरी खास एवं अपने छत से हिंसा भड़काया था।
उदित राज के इस परिसंघ ने न केवल ब्राह्मणो के खिलाफ घृणित टिप्पणी की बल्कि उनकी तुलना सूअर से कर डाली। इसके साथ ही उन्होंने अपने ट्वीट में देश की न्यायपालिका के खिलाफ भी अपमानजनक टिप्पणी की।