पैड में केले के रेशे के अलावा टेरी, पॉलिस्टर पिलिंग और कॉटन का इस्तेमाल किया गया है। महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले गीलेपन से छुटकारा मिलेगा, क्योंकि इसमें मौजूद विस्कोस और पॉलिस्टर अत्यधिक शोषक है।
इस ड्रोन को सीडी स्पेस रोबॉटिक्स लिमिटेड नाम की एक फ़र्म ने बनाया था और इसके मालिक निखिल उपाधे हैं जो आईआईटी कानपुर के छात्र रह चुके हैं। उपाधे के अनुसार, “हमने जो ड्रोन बनाए हैं उनमें कूलिंग किट के साथ-साथ आपातकालीन दवाओं और ब्लड यूनिट को ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता है।”
23 साल का राकेश राजस्थान में नागौर जिले के पुंदलोता का निवासी है। 2019 में IIT दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद आरोपित अपनी फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को हैदराबाद में नौकरी का ऑफर देकर ठगता था।
ये किसी की सोच से भी परे की बात है की उनका फेंका हुआ कचरा ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है, ये भविष्य की ऊर्जा है, नतीजे बेहद चौंकाने वाले और उत्साह भरने वाले हैं, अब हमें इनके व्यवसायिक उत्पादन और उसके आर्थिक पहलू पर भी काम करने की ज़रूरत है।