“अच्छा, हमारा वो सिद्धू किधर है? मैं कह रहा हूँ हमारा सिद्धू...आ गया वो?" जिस पर आसपास के लोग जोर-जोर से हँसने लगते हैं। इसके बाद वीडियो में 1:23 पर इमरान खान कहते हैं कि मनमोहन आ गया? तो उसी ग्रुप में शामिल एक महिला कहती है, “उसको रोकेंगे तो…."
कॉन्ग्रेस नेता, पूर्व सांसद व पंजाब सरकार में भूतपूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने आज करतारपुर साहिब के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शान में जम कर कसीदे पढ़े।
इससे पहले इमरान खान ने ऐलान किया था कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन और गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर आने वाले श्रद्धालुओं से एंट्री फीस नहीं ली जाएगी, इसके बावजूद उन्हीं की सेना प्रमुख बाजवा ने पीएम की बात को खारिज कर दिया।
सेना ने आजादी मार्च को समाप्त करने से ऐसे वक्त में इनकार किया है जब इमरान के तख्तापलट को लेकर अटकलें लगाई जा रही। बताया जा रहा कि सेना अब बिलावल भुट्टो जरदारी को देश का प्रधानमंत्री बनाने की योजना पर काम कर रही है।
पाकिस्तान ने जो वीडियो जारी किया है उससे उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। वीडियो में जहॉं एक तरफ पाकिस्तान में मौजूद सभी गुरुद्वारों की झलक हैं, वहीं खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भी नजर आ रहा है।
मौलाना ने पाकिस्तान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि देखो मोदी कामयाब भी हो गया और कश्मीर का मसला हल भी हो गया। उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान कश्मीर की जंग नहीं लड़ रहे हैं बल्कि वो कश्मीर को बेच कर कमाने की फ़िराक़ में हैं।
आजादी मार्च की भयावहता देखते हुए ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रशासन से 5,000 अतिरिक्त पुलिस बल की माँग की गई है। वहीं, इस्लामाबाद में तैनाती के लिए 3,000 अतिरक्त पुलिस बल भेज दिए गए हैं। सरकार की पूरी कोशिश ये है कि प्रदर्शन स्थल से मौलाना और उसके अनुयायियों को आगे न बढ़ने दिया जाए, लेकिन.....
"सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मैसेजिंग एप के ज़रिए लोगों को आतंकवादी बनाने को लेकर काम तेज़ी से चल रहा है। इस सम्बन्ध में भारतीय अधिकारियों ने वैश्विक सोशल मीडिया कम्पनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात की है।"
इस्लामाबाद के रेड जोन में घुस सकते हैं आजादी मार्च में शामिल प्रदर्शनकारी। भीड़ इतनी कि बलप्रयोग से भी हटाने में हो सकती है मुश्किल। इमरान ने कहा- मौलाना को हर हल में रोका जाए।
"हाँ, यह एक खतरे की घंटी है। फजलुर्रहमान इमरान खान को सत्ता से बेदखल करने के लिए आजादी मार्च का आयोजन कर अपना ताकत दिखाना चाहता है। मौलाना अपनी व्यक्तिगत प्रतिशोध के अलावा पाकिस्तान में आर्थिक संकट की स्थिति को भी भुनाने में लगा हुआ है।"