13 जुलाई 1931 की जिस घटना को 'इस्लामी विद्रोह' बताया जाता है, असल में वह हिंदुओं के विरुद्ध मजहबी घृणा से उपजी थी। अब जिहादियों को 'शहीद' बता छुट्टी की माँग हो रही है।
बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ का सबसे बड़ा शिकार अल्पसंख्यक हिन्दू और बाकी समुदाय हैं। अगस्त, 2024 के बाद से बांग्लादेश में 1200 से अधिक घटनाएँ अल्पसंख्यकों पर हमले की सामने आ चुकी हैं।
जुलूस में युवाओं ने हाथियों पर चढ़कर आतंकवादी कमांडरों याह्या सिनवार, इस्माइल हानिया और हसन नसरल्लाह के पोस्टर लहराए। इन तीनों को ही इजरायल ढेर कर चुका है।