"हमारे पास जो कुछ भी है, उसे बचाने के लिए हमें कश्मीरियों की जरूरत है, हमारा अपना संविधान है, हमारे पास एक ऐसा दर्जा है जो बाहर के लोगों को यहाँ संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देता है। आज घाटी में जो हालात हैं, वे डरावने हैं, जम्मू कश्मीर बैंक खत्म हो चुका है और धीरे-धीरे वे सब कुछ खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।"
"मैंने जो कुछ भी कहा, वह यहाँ लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार की वजह से आई हताशा और गुस्से में कहा। गवर्नर के रूप में मुझे ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था, लेकिन मेरी निजी सोच वही है, जो मैंने कहा। बहुत-से राजनेता और बड़े नौकरशाह भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं।"
NIA का दावा है कि भट के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से बेहद करीबी संबंध थे और उसने अपने अखबार में लिखने के लिए कई जिहादी पत्रकारों को भी नौकरी पर रखा हुआ है। उनमें से कुछ पत्रकार अब कथित रुप से कश्मीर के प्रेस क्लब के कार्यकारी सदस्य हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी बसीर अहमद को गिरफ्तार किया है। इस आतंकी पर ₹2 लाख का इनाम था। मुखबिर की सूचना पर स्पेशल सेल ने श्रीनगर से...
अलगाववादियों ने यह बंद वर्ष 1931 में 13 जुलाई को श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में मारे गए करीब 22 लोगों के विरोध में किया है। अलगाववादी हर साल 13 जुलाई को शहीद दिवस के तौर पर मनाते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद इस पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। लोगों का कहना है कि जब वह खुद यह कह रहे हैं कि वह पाकिस्तानी हैं तो उन्हें भारत में रहने का अधिकार नहीं, उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाए।
कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच 1 जुलाई से अमरनाथ यात्रा चल रही है। यात्रा पर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हमले की आशंका को देखते हुए बेहद कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए 40,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
शाह फैसल ने जिस प्रकार से बयान देकर अलगाववादियों का समर्थन करने की कोशिश की है। वह शर्मनाक है राज्य की शिक्षा व्यवस्था से लेकर चुनावों तक में खलल डालने वाले अलगाववादी नेता घाटी के लोगों को इन सबके ख़िलाफ़ भड़काते हैं, लेकिन अपने बच्चों को विदेश भेजकर उच्च शिक्षा सुनिश्चित करते हैं।
2018 में सुरक्षाबलों ने कुल 257 आतंकी मारे। इनमें 146 कश्मीरी थे, जबकि 111 आतंकी दूसरे मुल्क के थे। जबकि 2016 और 2017 में ये आँकड़े उलटे देखने को मिले थे। इन वर्षों में सुरक्षाबल द्वारा दूसरे मुल्कों के आतंकी ज्यादा मारे गए थे और स्थानीय कम।
370 पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "हसनैन जी ने कहा 370 है। लेकिन वो इसके साथ जुड़ा अस्थाई शब्द को भूल जाते हैं। ये टेम्परेरी प्रोविज़न है। 370 हमारे संविधान का अस्थाई मुद्दा है।"