सोशल मीडिया पर चाँदबाग की वो वीडियो सैलाब की तरह तैर रही है, जिसमें मुस्लिम महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों पर पत्थर से हमला कर उन्हें घायल किया। लेकिन, इसके बाद भी सुशांत सिंह पूछते हैं कि दिल्ली की हिंसक भीड़ में औरतें थीं क्या? मैंने तो नहीं सुना। सोचिए कितना शर्मसार करने वाला है सुशांत का ये ट्वीट।
इरेना का कहना है कि इसी जलन और हीनता की भावना का शिकार होकर हिन्दू मर्द मुस्लिमों के व्यापार और घरों को नुकसान पहुँचाते हैं, जला डालते हैं- ताकि मुस्लिम महिलाओं को बेइज्जत कर सकें। उन्होंने ये नहीं बताया कि महिलाओं को बुर्के में कैद रखना किस समाज की संस्कृति का हिस्सा है?
मेरठ को 3 सुपर जोन, 9 जोन और 31 सेक्टरों में बाँटकर सुरक्षा की जा रही है। होली पर हुड़दंग करने वालों का पिछले पाँच साल का रिकॉर्ड खँगालकर उनको पकड़ने के लिए पुलिस ने अभियान चला रखा है। इसमें अभी तक 250 बवालियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
DOIT अर्बन वेंचर्स राणा कपूर की तीनों बेटियों द्वारा संचालित। इनका गोरखधंधा नं-1: DOIT से 3000 करोड़ रुपए का कर्ज फिर 600 करोड़ रुपए की रिश्वत। गोरखधंधा नं-2: 735 करोड़ रुपए के वैल्यूएशन वाली पांच प्रॉपर्टीज़ जिस कंपनी को दी, उसकी खऱीद प्राइज केवल 40 करोड़ रुपए ही!
दंगाई भीड़ ने बिजेंद्र के घर की छत को ही हमले के लिए बेस बना लिया और वहाँ कब्ज़ा कर लिया। छत पर क़रीब 90 आदमी थे। पत्थर ढो-ढो कर लाए जा रहे थे। मंदिर पर पूरे 6 घंटे तक हमले किए गए लेकिन वामपंथी मीडिया (ख़ासकर न्यूज़लॉन्ड्री) ने "मंदिर पर हमला हुआ ही नहीं" का नैरेटिव गढ़ा।
निधि को ससुराल वालों ने ही बेदखल कर दिया था। जब उनके पति वीरगति को प्राप्त हुए, तब निधि के पेट में 4 महीने का बच्चा था। सुसराल वालों ने उनके पति की मृत्यु के बाद उन्हें सदमे से उबरने के लिए समय भी नहीं दिया और तुरंत निकल जाने को कहा। इसके बाद...
खतने के जरिए महिलाएँ पवित्र होती हैं। इससे समुदाय में उनका मान बढ़ता है और ज्यादा कामेच्छा नहीं जगती। - यही वो सोच है, जिसके कारण छोटी बच्चियों के जननांगों के साथ इतनी क्रूर प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मनीष तिवारी ने कॉन्ग्रेस नेता की शादी की सूचना दी। उन्होंने बताया कि वो रवीना को 1985 से ही जानते हैं और दोनों की जोड़ी खूब जम भी रही है। मनीष जब 'वर्ल्ड फेस्टिवल ऑफ यूथ एंड स्टूडेंट्स' में भाग लेने मॉस्को गए थे, तब उनकी मुलाक़ात रवीना से हुई थी।
दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में छोटे से लेकर बड़े तक, जवान से लेकर बूढ़े तक और महिलाओं से लेकर बच्चों तक - हर कोई शामिल था। इसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लड़ाई एक दिन या CAA विरोध की नहीं बल्कि गजवा-ए-हिंद के सपने को साकार करने की थी।