"आपने अमित शाह को सलाह दी कि वो अपने नाम से 'शाह' उपनाम हटा लें। आपने कहा कि ये फ़ारसी शब्द है। आपने ये भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन मुस्लिमों पर हमला करने के लिए किया गया। आपने वीर सावरकर को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया।"
आज हम आपके सामने इंडिया टुडे की पत्रकारिता की पोल खोलने के लिए उनकी 5 ऐसी खबरें लेकर आए हैं। जब इस समूह ने अपने पाठक और दर्शक को सूचना देने के नाम पर या तो मजाक उड़ाया या फिर फेक न्यूज़ और व्यंग्य को खबर बताया।
ED ने जब वाड्रा से उनकी कंपनी द्वारा जमीन की खरीद के लिए फंड के सोर्स के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें फंड का सोर्स याद नहीं है। वाड्रा ने ईडी से कहा कि उन्होंने केवल "गूगल मैप" पर जमीन देखी थी।
बात 2006 की है। नए-नए खुले IBN7 और CNN-IBN को किसी सनसनीखेज स्टोरी की तलाश थी। राजदीप उसके चीफ एडिटर थे। TRP के लिए इन्होंने रिपोर्टर जमशेद खान से एक फर्जी स्टिंग करवाया डॉ अग्रवाल का। खबर यह बनाई कि डॉक्टर भीख माँगने वाले गिरोह के लिए बच्चों का हाथ-पैर काटते हैं। जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला लेकिन...
“अगर किसी राज्य में छात्रों के साथ इस तरह की हिंसा होती तो मुख्यमंत्री जरूर उनसे मिलने जाते और सहानुभूति जताते। असल में केजरीवाल ‘जिम्मेदारी के बिना सत्ता’ चाहते हैं, जैसा कि नपुंसक हमेशा से चाहते हैं।”
एक वीडियो में सीपीआई नेता डी. राजा की बेटी अपराजिता के हाथ में डंडा है। लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्टिस और छात्र विडियो में मफलर पहने हुए रॉड और डंडे इकट्ठे करते दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में वामपंथी प्रोफेसर बीएस बडोला को सुरक्षाकर्मियों को धमकी देते देखा जा सकता है।
ऑपइंडिया पर ABVP JNU के छात्र मनीष जांगिड़ का वो इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे साज़िश के तहत जेएनयू में हिंसा हुई और तुरंत कॉन्ग्रेस व वामपंथी नेता पहुँच गए। उन्होंने राहुल कँवल पर भी बड़ा आरोप लगाया। जेएनयू में कैसे वामपंथी गुंडों को बचाया जा रहा है, जानें मनीष के शब्दों में।
साबित हो चुका है कि अक्षत ABVP का कार्यकर्ता नहीं। 'इंडिया टुडे' की पत्रकार वामपंथियों के साथ कानाफूसी और सेटिंग करते देखी गईं। कँवल की थेथरई का आलम ये है कि वो सीधा कह रहे कि वो सवालों के जवाब नहीं देंगे। फ़र्ज़ी स्टिंग को 'पाथ ब्रेकिंग' बताने के पीछे का सच।