यूपी में कॉन्ग्रेसी भी योगी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर निकल गए। लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के बाहर कॉन्ग्रेस के झंडे लेकर पहुँचे कार्यकर्ताओं ने तब भागना शुरू कर दिया, जब यूपी पुलिस ने लाठियों से उन्हें जम कर पीटा। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी वायरल हो गया।
के विजय कुमार को बहुचर्चित चन्दन तस्कर वीरप्पन को मार गिराने के लिए जाना जाता है। उन्होंने तमिलनाडु पुलिस की उस स्पेशल टास्क फ़ोर्स का नेतृत्व किया था, जिसने दशकों तक कई राज्यों की पुलिस को छकाने वाले वीरप्पन को 2004 में मार गिराया था।
23 वर्षीय पीड़िता के साथ ये घटना तब हुई, जब वह रायबरेली कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रही थीं। पीड़िता ने मरने से कुछ देर पहले अपने भाई से कहा था- "भैया, बचा लो! मैं मरणा नहीं चाहती। जिन्होंने मेरे साथ ग़लत किया है, उन्हें मैं मौत की सज़ा पाते देखना चाहती हूँ।"
हैदराबाद एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताते हुए कोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि चारों आरोपितों के शवों के पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफ़ी कराई जाए। उन वीडियो फुटेज को कोर्ट में सब्मिट किया जाएगा। इसके बाद...
इसमें कहा कि रामराज्य कुछ और नहीं बल्कि शिर्क (अत्याचारी, गैर मजहबी) का झंडा और बाबरी विध्वंस तौहीद अर्थात न्याय के झंडे के पतन के अलावा और कुछ नहीं है।
आँकड़ों के मुताबिक़, यूपी में पिछले दो साल में 5,178 मुठभेड़ों में पुलिस ने 103 अपराधियों को मार गिराया है। 1,859 अपराधी पुलिस कार्रवाई में जख्मी हुए। इसके अलावा, 17,745 अपराधियों ने डर से आत्मसमर्पण किया या खुद ही जमानत रद्द करा जेल पहुँच गए।
हैदराबाद इनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पुलिस का आभार व्यक्त किया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुँचे हजारों लोगों ने पुलिस पर फूल बरसाए हैं और महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी प्रकट करते हुए उन्हें राखी बाँधी है। एसीपी और डीसीपी जिंदाबाद के नारे भी...
साल 2008, दो लड़कियाँ इंजिनियरिंग की पढ़ाई करती थीं - स्वपनिका और प्रनिथा। स्वपनिका को श्रीनिवास ने प्रोपोज किया। स्वपनिका ने ठुकरा दिया। लेकिन 'मर्द' श्रीनिवास ने इसे अपना अपमान समझा। अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर उसने स्वपनिका के साथ-साथ प्रनिथा पर भी एसिड फेंक दिया।
क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिहाज से पुलिस चारों आरोपित दरिंदों को उसी हाइवे के पास लेकर पहुँची थी, जहाँ यह जघन्य अपराध किया गया था। लेकिन वहाँ से ये सभी भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को मार गिराया।
विपक्षी दलों को दिक्कत बुलेट ट्रेन से नहीं है। उनका विरोध राजनीतिक ओछेपन के अलावा कुछ नहीं है। उनको दिक्कत इस बात से है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी हो जाएगी तो इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाएगा।