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तू चल मैं आता हूँ: बरखा दत्त माँगे आज का ‘गाँधी’, याद आई लोमड़ी-कौव्वे की कहानी

मीडिया गिरोह ऐसे आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले। बरखा दत्त का ट्वीट इसकी प्रतिध्वनि है। यूॅं ही नहीं कहते- तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ।

अमेठी की मालविका में डूबे ₹366 करोड़, मनमोहन सिंह के जमाने में जान-बूझकर किया गया था घाटे का सौदा

1998 में बंद पड़ी एक कंपनी के अधिग्रहण के लिए 2009 में सेल को मजबूर किया गया। प्रचार ऐसे किया गया मानो बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। नतीजा सिफर रहा। 10 साल बाद भी जमीन का टाइटल सेल के नाम ट्रांसफर नहीं हुआ है।

भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

NDTV के सम्पादक श्रीनिवासन जैन नागरिकता विधेयक को लेकर अपने ट्वीट के चंद शब्दों 'excludes a specific minority community' में हिन्दुओं के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने, उन्हें नाहक ग्लानि का अनुभव कराने और कथित अल्पसंख्यकों को बिना किसी ठोस आधार के बेचारा दिखाने का जो प्रपंच रचा है, उसे...

कर्नाटक उपचुनाव पर कुमारस्वामी का बयान- हम दुःखी थे, लेकिन हमसे ज़्यादा दुःखी 3 और लोग थे

कर्नाटक में भाजपा को 6 सीटें चाहिए थीं लेकिन पार्टी 12 जीत रही है। शाह शायद अब डबल का आँकड़ा लेकर चल रहे हैं। डीके शिवकुमार नए 'चाणक्य' बनते-बनते रह गए। कुमारस्वामी और देवगौड़ा तो रो कर दर्द कम कर लेंगे, मुंबई की तिकड़ी का क्या होगा अब? मोदी ने जवाब दे दिया है।

हर सवाल का जवाब दूँगा, भागना मत: शाह ने पेश किया CAB, ओवैसी ने कहा- इस हिटलर से बचाओ

CAB पास होने के बाद बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को 'अवैध इमिग्रेंट' नहीं माना जाएगा। उन्हें भारत का नागरिक बनाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

बलात्कारी कहकर गोली मारने Vs न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने Vs ‘बनाना रिपब्लिक’ में फर्क होता है

अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?

‘हिन्दुओं’ को नहीं मिलने चाहिए वोटिंग राइट्स: नागरिकता विधेयक पर ‘सेक्युलर’ बनी शिवसेना

शिवसेना ने 'सामना' के जरिए पूछा कि क्या भारत में पहले से समस्याओं की कमी थी जो CAB के रूप में एक नई समस्या खड़ी कर दी गई है? शिवसेना ने दावा किया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा बिहार में भी इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहाँ भाजपा सत्ता में है।

‘भैया मैं साँस नहीं ले पा रहा, मेरे बच्चों का ख्याल रखना’ – मौत से पहले आखिरी कॉल का दर्दनाक Audio

“अब्बा बहुत डर लग रहा है। फैक्ट्री में आग लग गई है। बचना मुश्किल लग रहा है। हमें बचा लो।” जवाब में पिता ने कहा, “चिंता मत करो, अल्लाह पर भरोसा रखो।” इसके बाद लाचार पिता हेलो... हेलो... बोलते रहे, लेकिन उन्हें बेटे की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

…जिस बिल्डिंग ने लील लीं 43 जिंदगियाँ, फिर लगी वहीं आग: हर तरफ धुआँ, मौके पर दमकल की 4 गाड़ियाँ

24 घंटे बाद भी आग का धुआँ ख़त्म नहीं हुआ है। वहाँ स्थित इमारतों से अब भी धुआँ निकल रहा है। पुलिस ने जाँच के लिए फैक्ट्री सील कर रखी है। सोमवार को लोगों ने तीसरी मंजिल से आग की लपटें उठते देखी, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।

महाभारत में ‘बलात्कार’ की क्या सजा थी? इसे स्त्री की ‘इज्जत लुटने’ जैसी बेहूदी बात से किसने जोड़ा?

महाभारत की द्रौपदी वैसी नहीं थी जैसा उसे पूर्वग्रहों से ग्रस्त कुछ लोग दर्शाना चाहते हैं। क्या वो फैसले लेती नजर आती हैं? जवाब है- हाँ। जैसे आज के भारत में राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को क्षमा करने के अधिकार होते हैं, लगभग वैसे ही द्रौपदी भी मृत्युदंड माफ़ करती नजर आती है।

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