आयशा ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो देश में अल्पसंख्यक राजनीति को उभरते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक राजनीति का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसका आशय 'मुस्लिम-बहुजन पॉलिटिक्स' से है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन का कहना है कि धर्मांतरण के अलावा 'चर्च प्लांटिंग' भी एक अहम मुद्दा है। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों से ज्यादा चर्च बना दिए गए हैं ताकि उसका प्रभाव दिखे।
किसानों की पूर्ण कर्ज माफी के नाम पर भले दो लाख रुपए तक का कर्ज ही माफ करने का ऐलान किया गया हो, लेकिन उसका श्रेय लूटने के लिए महाविकास अघाड़ी के साझेदारों में होड़ लग गई है। साथी दलों का कहना है कि शिवसेना अकेले श्रेय लूटने की कोशिश कर रही है जो ठीक नहीं है।
कॉन्ग्रेस ने जो वीडियो जारी किया है उसमें कहीं भी महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी का गला पकड़ते या प्रियंका जमीन पर गिरती नजर नहीं आतीं, जैसा उन्होंने दावा किया था। उलटे महिला अधिकारी के साथ प्रियंका गॉंधी के साथ खड़े लोग ही धक्का-मुक्की कर रहे हैं।
2 दिन में 10, 1 महीने में 77 बच्चों की मौत। ये आपके लिए भले बच्चे हों। लेकिन, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए बस नंबर हैं। जिन्हें गिनकर उसने बता दिया है कि इस बार सबसे कम मरे हैं। यह भी बताया है कि अस्पतालों में रोज दो-चार मरते ही हैं, कोई नई बात नहीं है।
मौलाना अबुल कलाम का राष्ट्रीयता और भारतीयता में गहरा यकीन था। उन्होंने धर्म के आधार पर देश के विभाजन का विरोध किया था। पाकिस्तान परस्मुतों को चेताया था। शायद यही कारण है कि इरफान हबीब जैसे वामपंथी उनका नाम सुनते ही आपा खो बैठते हैं।
हाल ही में ‘मेक इन इंडिया’ का माखौल उड़ाते हुए ‘रेप इन इंडिया’ कहने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि असम को नागपुर नहीं चलाएगा। असम को RSS की चड्डी वाले नहीं चलाएँगे।
पहले वे जनेऊधारी हिंदू बने। फिर दत्तात्रेय गोत्री। पर जब मौका आया तो कॉन्ग्रेस ने न बहुसंख्यकों की भावना का मान रखा और न देशहित का। तुष्टिकरण के फेर में न वह नेहरू के साथ निभा पाई और न ही उनसे पल्ला छुड़ा पाई।
NDTV ने ट्वीट के पूरे अर्थ को ही अपने मन-मुताबिक बदल दिया। जहाँ All the rioters are shocked (to see police action) होना चाहिए, वहाँ लिखा - 'SHOCKED EVERY PROTESTER' जिसका मतलब है कि ‘हर प्रदर्शनकारी को (पुलिस ने/सरकार ने) हैरान कर दिया।
मार्क्सवादियों ने दिल्ली के राजनीति चश्मे से मुगलों का महिमामंडन और हिन्दू-मुस्लिम एकता के खोखले दावे करते हुए मनगढ़ंत इतिहास गढ़ा। इतिहास लेखन के कार्य में वामपंथियों ने दक्षिणपंथियों को बिल्कुल हाशिए पर रखा। जबकि वो यह अच्छी तरह से जानते थे कि वास्तव में वो भारत का इतिहास था ही नहीं, जिसका प्रचार वामपंथी अपने प्रोपेगेंडा के तहत कर रहे थे।