फैज की "हम देखेंगे... बस नाम रहेगा अल्लाह का" वाले पर इसी मीडिया गिरोह ने संदर्भ की बात करते हुए लेख पर लेख दे मारे। तो क्या दंगे-आगजनी की जगह पुलिस के निर्णय संदर्भ से परे हो जाते हैं? उसकी व्याख्या क्यों नहीं! क्योंकि ये आपके नैरेटिव को सूट नहीं करता।
"डिटेंशन कैंप ज़रूरी हैं। जेलों में क़ैद विदेशियों की सज़ा पूरी होने के बाद, उन्हें कहाँ रखा जाएगा? जब तक उन्हें उनके देश में वापस नहीं भेजा जाता है, जहाँ से वे आए थे, तब तक आपको उन्हें एक डिटेंशन कैंप में ही रखना होगा।"
जावड़ेकर ने राहुल गाँधी के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार है, जहाँ एक अस्पताल में एक महीने में 77 बच्चों की मृत्यु हुई है। अगर राहुल गाँधी को जाना है तो वहांँ जाएँ और अपनी सरकार को सुधारें। उसके बजाय ये बेतुके बयान देना बंद करें।
ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस के ट्विटर अकॉउंट पर पोस्ट इस आपत्तिजनक कार्टून में योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने के प्रयास के अलावा सबसे विवादस्पद था कि जिस नक्शे को कार्टून में दर्शाया गया, उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही गायब था।
CAA विरोध में सिर्फ़ तिरंगा और महात्मा गाँधी की तस्वीर लेकर लोग चल रहे? सब कुछ शांति से हो रहा? देश में कहीं कोई दंगा नहीं? प्रोपेगेंडा पत्रकार राजदीप ने तो यही कहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें उनकी औकात बता दी गई - फोटो, वीडियो के साथ, प्रमाण देकर।
24 साल तक कानूनी लड़ाई के अलावा नाम्बी नारायणन की एक कहानी और भी है। कहानी राजनीति और साजिश वाली। उस कहानी के अनुसार पूर्व रॉ अधिकारी ने भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी पर कई गंभीर आरोप लगाए। यह तब हुआ जब एक पत्रकार चिरंजीवी भट ने...
शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित। शरारती तत्वों पर ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है। 20 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद। इसके अलावा, राज्य में पहले से ही धारा-144 लगी हुई है।
जिस पैम्पलेट में प्रोफेसरों के हस्ताक्षर के साथ दावा किया गया था कि 51 प्रोफेसर CAA के विरोध में हैं, फ़र्ज़ी है। उस पैम्पलेट में कहा गया था कि ये क़ानून स्वीकार्य नहीं है और ये बँटवारे की भावना फैला रहा है। अब कई प्रोफेसरों ने ऐसी किसी बात का समर्थन करने से इनकार किया है।
अगर इस भीड़ को देख कर तुम्हें डर लग रहा है, तो फिर डरो क्योंकि ये डर पूरे भारतीय समाज की शांति के लिए अच्छा है। अगर ये डर तुम्हारे भीतर रहेगा कि तुम्हारी आगजनी, पत्थरबाजी, गोली चलाने की प्रवृत्ति के टक्कर में एक ऐसी टोली है जो हर जिले में तैनात है, तो तुम सड़कों पर आ कर आग लगाने से पहले सोचोगे।
कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के लगभग 150 सदस्य चोरी-छिपे दिल्ली आते हैं - वो भी एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करते हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया दंगों से ठीक 2 दिन पहले। अगले 2 दिनों तक ये सभी जामिया इलाक़े में ही कहीं छिपे रहते हैं। दंगे वाले दिन ये बाहर निकलते हैं और...