अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले केंद्र सरकार ने सभी सांसदों (NDA) और मंत्रियों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहने को कहा है। इसके साथ ही जैसे-जैसे फैसले की घड़ी नज़दीक आ रही हैं वैसे-वैसे कानून व्यवस्था कायम रखने वाली एजेंसियाँ पूरी तरह से मुस्तैद हो रही हैं।
"अगर सरकार से उन्हें परमिशन नहीं दी गई तो वह तय कार्यक्रम से एक दिन पहले आठ नवम्बर को वाघा स्थित भारत-पाक सीमा से पाकिस्तान जाएँगे, रात को गुरूद्वारे में ठहर कर अगले कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे और फिर अगले दिन गलियारे के ज़रिए भारत वापस आएँगे।"
5 नवंबर बीत जाने के बाद कॉन्ग्रेस नींद से उठी और यह ध्यान आया कि उन्होंने एक और अंतिम तिथि में चूक कर दी। इसके बाद ट्विटर पर यूज़रों ने मौका नहीं गँवाया कॉन्ग्रेस को उसके पूर्व अध्यक्ष से भी बड़ा मज़ाक बताने में, एक ने लिखा कि जल्दी क्या है, अभी तो नया साल पड़ा हुआ है.....
समय आ गया है कि पोलिटिकल साइंटिस्ट का ढोंग करने वाले प्रोपेगंडाबाजों को मान लेना चाहिए कि बहुंसख्यकों की प्रकृति ही सेक्युलर मानी जाती है। अनगिनत पंथों में फैले हुए हिन्दू धर्म ने हमेशा आस्था, विचारधारा, पंथ और मान्यताओं के लिए छतरी का काम किया है। जबकि......
"बाबरी मस्जिद, कानून और न्याय की नजर में एक मस्जिद थी। करीब 400 साल तक मस्जिद थी। शरीयत के हिसाब से वो आज भी मस्जिद है। सत्ता और ताकत के दम पर उसे कोई भी रूप दे दिया जाए कयामत तक वह मस्जिद ही रहेगी।"
राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद और आतंकवादी हमले की आशंका के बीच परिक्रमा बुधवार सुबह पूरी हुई। अब प्रशासन गुरुवार को होने वाली पंचकोसी परिक्रमा की तैयारी में जुटा है। अनुमान है कि 20 लाख श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेंगे।
इस बैठक में शिवसेना के 6 मंत्री शामिल हुए। साउथ मुंबई में स्थित सह्याद्रि गेस्ट हाउस में ये बैठक हुई, जिसमें एकनाथ शिंदे और रामदास कदम भी शामिल हुए। दोनों शिवसेना नेता महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं।
पवार ने सरकार बनाने के लिए शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस-एनसीपी की अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति शासन से बचने का एकमात्र विकल्प यह है कि भाजपा-शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँ।
ख़ुद को रवीश का फैन बताने वाला अरुण पुलिस के डर से ट्विटर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ, क्योंकि उसकी सारी करतूतें एक-एक कर के सामने आ रही थीं और लोग दिल्ली पुलिस को टैग कर के उस पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।
भाजपा और शिवसेना बैकडोर से बातचीत के लिए राजी हो सकते हैं। हालाँकि, भाजपा सीएम, स्पीकर और गृह मंत्री का पद अपने पास ही रखेगी और इन्हें लेकर कोई समझौता नहीं होगा। भाजपा मंत्रियों की संख्या को लेकर अपने रुख में नरमी ला सकती है।