'रवीश बुद्धि' पत्रकारिता के चोले में वही असर छोड़ते हैं, जैसा समाज में 'जड़ बुद्धि'। पत्रकारिता में गहराते 'रवीश बुद्धि' का नमूना ही है कि नवभारत टाइम्स के पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा को जिंदादिली की तस्वीर में कमीनापन, बेशर्मी और प्रचार की भूख, सब एक साथ दिखे।
1974 में तुर्की की सेना ने साइप्रस पर हमला किया था और द्वीपीय देश के 36% भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस की स्वतन्त्रता, सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए तुर्की को दबाव में डाल दिया।
रवीश कुमार आईटी सेल के लड़कों के बारे में तो बता दिए, तालियाँ भी लूट गए लेकिन... उन लड़कियों को तीन तलाक, हलाला, मदरसे की हकीकत, बलात्कारी मौलवियों, कौशाम्बी जैसी घटनाओं के बारे में बताना भूल गए। इनके शब्दों के भ्रमजाल में फँसने से बचना लड़कियो!
अमित शाह ने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से भारत सरकार द्वारा अब तक जम्मू कश्मीर को 2,77,000 करोड़ रुपए भेजे जा चुके हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर यह रुपया कहाँ गया, कौन खा गया? अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में पर्यटन की संभावनाओं की चर्चा करते हुए कहा कि यह एक विकसित राज्य बनेगा।
पीएम मोदी शनिवार को अमेरिका दौरे से लौटे। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। लौटने के बाद उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल सैनिकों को सलाम किया क्योंकि उस दिन सर्जिकल स्ट्राइक के 3 साल पूरे हुए थे।
पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर तिरुवनंतपुरम सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर 2009, 2014 और 2019 में जीत दर्ज कर चुके हैं। हालिया लोकसभा चुनावों में उन्होंने पिछले दोनों चुनावों से भी ज्यादा मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी।
पाकिस्तान और तुर्की के साथ मलेशिया इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने वाला है। ऐसे में पाकिस्तानी सुर में उसका कश्मीर राग अलापना चौंकाता नहीं है। नाइक के प्रत्यर्पण से बचते रहे मलेशिया ने जम्मू-कश्मीर पर क़ब्ज़ा करने का आरोप लगाया है।
प्रधानमंत्री बनने से करीब छह महीने पहले इमरान ने बुशरा से किया था निकाह। हर मौके पर पर्दे में दिखने वाली बुशरा की छवि एक तंत्र-मंत्र और जादू टोना करने वाली शख्सियत के रूप में है। कहा जाता है कि बुशरा तंत्र विद्याओं को बखूबी जानती हैं और उनके पास बहुत सी शक्तियाँ हैं।
मैं जब इस समाज का हिस्सा होने के कारण सोचने लगता हूँ तो पाता हूँ कि ये चलता रहेगा क्योंकि मर्दों के दम्भ की सीढ़ी की अंतिम लकड़ी स्त्री पर अपने लिंग के प्रहार के रूप में ही परिणत होती है। पितृसत्ता का विकृत रूप यही है कि लड़की इस क्रूरतम हिंसा के विरोध में इस तरह से अपनी आत्मा को मार चुकी है कि जो करना है कर लो, पर वीडियो मत बनाओ।
वह 16 साल की उम्र से महिलाओं के मानवाधिकार की लड़ाई लड़ रही हैं। सेना की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाती हैं। उनकी आवाज खामोश करने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों ने कई साजिशें रची। मुश्किलों से लड़ गुलालाई बनीं अल्पसंख्यकों के लिए उम्मीद की नई किरण।