एस ए बाशा नाम के आतंकी को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग पहुँचे। उसे किसी 'हीरो' की तरह विदाई दी गई, जबकि उसके संगठन ने तमिलनाडु को कई बार आतंकी हमलों का दर्द दिया।
साल 2019 में जिस जामिया में सीएए-एनआरसी के विरोध के नाम पर हिंसा को अंजाम दिया गया था, वहाँ के छात्रों ने एक बार अपने परिसर में 'ला इलाहा इल्ललाह' की नारेबाजी की।