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मणिपुर में कुकी आतंकी इस्तेमाल कर रहे SpaceX का स्टारलिंक? हाई स्पीड इंरनेट डिवाइस मिलने से उठे सवाल, मस्क बोले- भारत में उनकी कंपनी की सेवा नहीं

यह पहली बार नहीं है कि भारतीय क्षेत्र में स्टारलिंक उपकरण पाए गए थे। नवंबर में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास भारतीय जलक्षेत्र में म्यांमार के एक जहाज को जब्त किया गया था। इसमें कई आपत्तिजनक सामग्रियों के अलावा, सुरक्षा बलों को ड्रग तस्करों के पास से उन्नत जीपीएस उपकरणों के अलावा एक स्पेसएक्स स्टारलिंक डिवाइस भी मिली थी।

हिंसाग्रस्त मणिपुर में सुरक्षा बलों ने कुकी विद्रोहियों वाले इम्फाल पूर्वी जिले से स्टारलिंक इंटरनेट डिवाइस, स्नाइपर राइफल, पिस्तौल, ग्रेनेड और अन्य हथियार बरामद किए हैं। अमेरिकी टेक दिग्गज एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक दुनिया की पहली सैटेलाइट है जो लाइसेंस मिलने के बाद दुनिया में कहीं भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट प्रदान करती है।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 13 दिसंबर को चुराचाँदपुर, चंदेल, इम्फाल पूर्व और कांगपोकपी सहित कई जिलों में एक अभियान चलाया गया था। इसी दौरान यह बरामदगी की गई है। भारत में विद्रोहियों द्वारा स्टारलिंक के उपयोग को लेकर एक सवाल के जवाब में मस्क ने कहा कि ये आरोप ‘झूठे’ हैं। उन्होंने कहा कि ‘भारत में स्टारलिंक उपग्रह बीम बंद’ हैं।

इम्फाल पूर्वी जिले के केराओ खुनौ में सुरक्षा बलों को एक स्टारलिंक राउटर और एंटीना जब्त मिला। यह सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्शन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (RPF)/पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा इस्तेमाल किए जा रहा था। एक 20-मीटर FTP केबल, एक सैटेलाइट राउटर और एक सैटेलाइट इंटरनेट एंटीना बरामद किया गया। इससे जाहिर है कि कुकी विद्रोहियों को कहीं बाहर से सहायता मिल रही है।

बता दें कि म्यांमार पहले से ही इस तरह के उपकरणों का उपयोग करता आ रहा है। सिग्नल इंटेलिजेंस के अनुसार, म्यांमार में ऐसे कई ठिकाने हैं जहाँ दुनिया भर के लोगों को ठगने के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराधियों द्वारा स्टारलिंक सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग किया जाता है। स्टारलिंक इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे भारत के पड़ोसी देशों में काम कर रहा है।

यह पहली बार नहीं है कि भारतीय क्षेत्र में स्टारलिंक उपकरण पाए गए थे। नवंबर में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास भारतीय जलक्षेत्र में म्यांमार के एक जहाज को जब्त किया गया था। यह जहाज 6 टन से अधिक मेथ की तस्करी करने की कोशिश कर रहा था। इनके पास से अन्य आपत्तिजनक सामग्रियों के अलावा, सुरक्षा बलों को ड्रग तस्करों के पास से उन्नत जीपीएस उपकरणों के साथ एक स्पेसएक्स स्टारलिंक डिवाइस भी मिली थी।

भारतीय सेना और असम राइफल्स की संयुक्त कार्रवाई में एक एके-47 राइफल, एक स्नाइपर राइफल, एक म्यांमार निर्मित 0.22 पिस्तौल, म्यांमार निर्मित पाँच 9 मिमी पिस्तौल, म्यांमार निर्मित एक 7.65 मिमी पिस्तौल, एक .303 बोल्ट-एक्शन राइफल, दो .303 सिंगल-बोल्ट स्नाइपर राइफल, एक 9 मिमी कार्बाइन मशीन गन (सीएमजी), पाँच फैक्टरी निर्मित 12 मिमी सिंगल बैरल राइफल, एक .22 राइफल, एक 12 मिमी शॉटगन, तीन स्थानीय रूप से निर्मित मोर्टार, एक सिंगल बैरल बंदूक, एक 5.56 मिमी एमए 4 असॉल्ट राइफल, एक एमए-1 (एमके-आई) असॉल्ट राइफल, एक एयर गन, ग्रेनेड और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया।

दरअसल, सुरक्षा बल 56 वर्षीय मैतेई शख्स लैशराम कमलबाबू सिंह की तलाश कर रहे थे। वे 25 नवंबर से कांगपोकपी जिले से लापता हो गए थे। सेना और असम राइफल्स के कम से कम 2,000 जवानों ने उनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी की। सेना ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में ट्रैकर कुत्तों, ड्रोन और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। इसी दौरान यह जखीरा मिला।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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