कॉन्ग्रेस ने जो मुस्लिमों के लिए किया वो भले ही मुस्लिम भूल जाएँ लेकिन हिंदुओं को याद रखना चाहिए, ताकि हमेशा दिमाग में रहे कैसे कॉन्ग्रेस हिंदुओं को दोयम दर्जे का बनाना चाहती थी।
दिसंबर 2019 में पाकिस्तान, अफ़ग़निस्तान और बांग्लादेश के पीड़ित अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने के लिए ये कानून लाया गया था, जिसका इस्लामी तत्वों ने खासा विरोध किया था।
आप दक्षिण भारत को देख लीजिए, जहाँ हर मंदिर के कुछ नियम-कानून हैं और आपको उसका अनुसरण करना पड़ता है। तमाम मंदिरों के अपने ड्रेस कोड भी हैं, प्रधानमंत्री या उनके सुरक्षाकर्मी भी जाते हैं तो उन्हें इसका पालन करना पड़ता है।
साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और मेजर रमेश के साथ जो हुआ... उसे देख कहना गलत नहीं कि यूपीए सरकार सिर्फ हिंदू आतंकवाद की थ्योरी को सही साबित करना चाहती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हलफनामे से खुलासा होता है कि उनके पास न तो अपनी कार है और न ही अपना कोई घर है। वहीं कैश की बात करें तो उनके पास सिर्फ 52 हजार रुपए कैश है।