"वो देश के भीतर रह कर जो कुछ भी करते हैं इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश की राजनीति को विदेश में लेकर जाना मेरे हिसाब से राष्ट्रीय हित में तो नहीं है।"
एक छात्रा ने ये भी बताया कि हर शुक्रवार (जुमा) को स्कूल में नमाज पढ़ना अनिवार्य था। हिंदी-अंग्रेजी से ज्यादा उर्दू-अरबी सिखाया जाता था। प्रार्थना में दुआ पढ़ने को कहा जाता था।