“कॉन्ग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियाँ यहाँ उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार होने पर संत गुरु रविदास जी को कभी मान-सम्मान नहीं देती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर फिर ये अपने स्वार्थ में इनके मन्दिरों/स्थलों आदि में जाकर किस्म-किस्म की नाटकबाजी जरूर करती हैं। इनसे सतर्क रहें।”
कपिल मायावती का बड़ा प्रशंसक है, जिसने मायावती के समर्थन में यूपी के विधानसभा चुनावों में जमकर प्रचार किया था। हालाँकि पेंच यह भी है कि जून 2017 से ही आरोपित युवक कपिल का फेसबुक अकाउंट बंद है। अब इसे लेकर पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही है और...
मायावती के इस बयान का लाखों ने सोशल मीडिया पर ख़ूब मखौल उड़ाया। बसपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पूरे देश भर में चल रहे आन्दोलनों के कारण परेशान हो गई है। बकौल मायावती, पूरे देश में महिला और युवा इस क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।
"अति दुःखद है कॉन्ग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व व खासकर प्रियंका गाँधी की इस मामले में चुप्पी साधे रखना। अच्छा होता कि वह यूपी की तरह उन गरीब पीड़ित माँओं से भी जाकर मिलतीं, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही के कारण उजड़ गई हैं।"
मायावती ने कहा है कि उन्होंने सबसे पहले सीएए को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताकर इसका विरोध किया था। बावजूद इसके विधायक परिहार ने CAA का समर्थन किया। पहले भी उन्हें कई बार पार्टी लाइन पर चलने की चेतावनी दी गई थी।
"मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती हूँ कि वे ऐसे सभी स्वार्थी तत्वों, संगठनों व पार्टियों से हमेशा सचेत रहें। वैसे ऐसे तत्वों को पार्टी कभी लेती नहीं है, चाहे वे कितना ही प्रयास क्यों न कर लें।"
"शिवसेना अपने एजेंडे पर कायम है। उसने CAB पर केंद्र का साथ दिया और अब सावरकर पर भी उसे कॉन्ग्रेस का रवैया बर्दाश्त नहीं है। फिर भी कांग्रेस महाराष्ट्र सरकार में बनी हुई है। यह नाटकबाजी है।"
आँकड़ों के मुताबिक़, यूपी में पिछले दो साल में 5,178 मुठभेड़ों में पुलिस ने 103 अपराधियों को मार गिराया है। 1,859 अपराधी पुलिस कार्रवाई में जख्मी हुए। इसके अलावा, 17,745 अपराधियों ने डर से आत्मसमर्पण किया या खुद ही जमानत रद्द करा जेल पहुँच गए।
लखनऊ गेस्ट हाउस कांड मामले में मुलायम सिंह यादव, उनके भाई शिवपाल सिंह यादव, बेनी प्रसाद वर्मा और आजम खान सहित कई नेताओं के खिलाफ मायावती की ओर से हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज करवाया गया था। फिलहाल, मायावती ने सिर्फ मुलायम सिंह यादव पर ही नरमी दिखाई है।
"कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने स्वार्थ के लिए जनता में वोटों के बँटने के भय को खूब प्रचारित किया। इससे बीएसपी के समर्पित वोटर तो कतई नहीं डिगे परन्तु अन्य वोटर जरूर भ्रमित हो गए। इसका परिणाम यह हुआ कि बीएसपी इस बार हरियाणा विधानसभा आमचुनाव में सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी।"