भीड़ में क़रीब 20 संदिग्ध लोग शामिल थे, जिन्होंने पटाखे उड़ाने से मना किया। जवाब में अमरेश व उनके दोस्तों के साथ उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद एक ने अमरेश के दोस्त की कनपट्टी पर बन्दूक रखा और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
22 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हो गई है। इतने पुराने मामले के गुनहगार शायद ही मिलें। लेकिन, इसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या इतने पुराने मामले दोबारा खोले जाने चाहिए?
हाल के समय में बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में तेजी देखी गई है। भाजपा नेताओं का कहना है, " पश्चिम बंगाल में कानून का कोई राज नहीं हैं। जहाँ आमिर को मारा गया, वह जगह एसडीपीओ कार्यालय से ज्यादा दूर नहीं है।"
मुस्लिम लीग ने CPI-M के एक वरिष्ठ नेता पी जयराजन को हत्या का दोषी ठहराते हुए उनके ख़िलाफ़ जाँच की माँग उठाई है। यहाँ यह बात ग़ौर करने वाली है कि जयराजन कई हत्या के मामलों में आरोपित हैं। उनके ख़िलाफ़ हत्या की जाँच की माँग उठाते हुए, मुस्लिम लीग ने मलप्पुरम में बंद का आह्वान किया था।
ब्राह्मण महासभा से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश शर्मा की हत्या के मुख्य आरोपित नासिर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उस पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था।
"कमलेश सर, मेरा नाम संजय है। मेरी बहन को एक मुस्लिम लड़के ने अपने प्यार में फँसा लिया है।" - संजय बने मोइनुद्दीन ने कमलेश तिवारी को यही फर्जी कहानी सुना कर बातचीत को आगे बढ़ाया। उसकी कहानी सुलकर कमलेश आवेश में आ गए और...
नृशंस हत्या का विरोध करने और हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करने के बजाय जमीयत-उलेमा-ए-हिंद हत्यारों के बचाव में सामने आया है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हत्यारों को बचाने में जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे।
अशफाक के फर्जी सोशल मीडिया अकॉउंट के बारे में पता लगने के बाद जाँच एजेंसियों को उसकी आईडी में मौजूद संजय नाम के अकॉउंट पर शक हुआ। पूछताछ हुई तो पता चला कि अशफाक के अलावा मोइनुद्दीन भी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी से मौजूद है।
अशफाक और मोइनुद्दीन कमलेश तिवारी की हत्या करके लखनऊ के होटल से बरेली गए। वहाँ उन्होंने मौलाना कैफी अली से संपर्क किया था और तीन घंटे तक वह उसी मौलाना के घर में रुके। बाद में कैफी ने ही दोनों हत्यारों के रुकने की व्यवस्था मदरसे में करवाई।
कमलेश तिवारी की हत्या करने से पहले मौलाना मोहसिन ने शरीयत का हवाला देकर अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन का ब्रेन वॉश किया था। जिसके कारण वे दोनों पकड़े जाने के बाद भी अपने अपराध को वाजिब-उल-कत्ल मानकर संतुष्ट हैं। उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।