अशफाक के फर्जी सोशल मीडिया अकॉउंट के बारे में पता लगने के बाद जाँच एजेंसियों को उसकी आईडी में मौजूद संजय नाम के अकॉउंट पर शक हुआ। पूछताछ हुई तो पता चला कि अशफाक के अलावा मोइनुद्दीन भी सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी से मौजूद है।
अशफाक और मोइनुद्दीन कमलेश तिवारी की हत्या करके लखनऊ के होटल से बरेली गए। वहाँ उन्होंने मौलाना कैफी अली से संपर्क किया था और तीन घंटे तक वह उसी मौलाना के घर में रुके। बाद में कैफी ने ही दोनों हत्यारों के रुकने की व्यवस्था मदरसे में करवाई।
कमलेश तिवारी की हत्या करने से पहले मौलाना मोहसिन ने शरीयत का हवाला देकर अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन का ब्रेन वॉश किया था। जिसके कारण वे दोनों पकड़े जाने के बाद भी अपने अपराध को वाजिब-उल-कत्ल मानकर संतुष्ट हैं। उन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है।
कमलेश तिवारी की हत्या से लेकर अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन की गिरफ़्तारी तक, अब तक क्या-क्या हुआ? इस पूरे घटनाक्रम में कौन-कौन से किरदार हैं और किन-किन जगहों पर किसकी गिरफ़्तारी हुई.......
कमलेश की हत्या के बाद हत्यारों ने सूरत में अपने साथियों को फोन कर जानकारी दी। फिर इस खबर से आसिम को अवगत कराया गया। आसिम ने हत्यारों की जमानत कराने का ठेका लिया था।
गोली मारने के बाद हत्यारों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार किए। गला रेतने के कारण ही कमलेश की मौत हुई। उनका गला 2 जगह से रेता गया। चेहरे के बाईं तरह बुलेट इंजरी मिली है।
गुजरात एटीएस के डीआईजी हिमांशु शुक्ल ने बताया कि दोनों हत्यारोपितों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। ये वही दोनों हैं, जिन्होंने भगवा वस्त्रों में कमलेश तिवारी के ख़ुर्शीदबाग स्थित घर में घुस कर उनकी हत्या कर दी थी।
यूपी के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि जल्द ही हत्यारों को पकड़ लिया जाएगा और साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सरकार हत्यारों के लिए मृत्युदंड की भी माँग करेगी।
अशफ़ाक़ और उसके हत्यारे साथी ने सिर्फ़ कमलेश तिवारी की ही नहीं बल्कि 'हिन्दू समाज पार्टी' के उत्तर प्रदेश प्रकोष्ठ के अध्यक्ष गौरव गोस्वामी को भी मारने की योजना बना रहे थे। इसीलिए प्लानिंग के तहत सूरत से लखनऊ आते समय उन्होंने गोस्वामी को कॉल कर के कमलेश तिवारी के दफ्तर आने की काफ़ी जिद की थी। गोस्वामी ने काम ज्यादा होने के कारण इनकार कर दिया, जिससे...
बरेली के एक मौलवी को हिरासत में लिया गया। एक ड्राइवर तौहीद को दबोचा गया। शाहजहाँपुर से लेकर पीलीभीत तक, हत्यारों को हर जगह से मदद मिल रही है। इस हत्याकांड के तार दुबई से भी जुड़े नज़र आ रहे हैं। उधर लखीमपुर क्षेत्र में एक टेरर फंडिंग के बड़े गैंग का खुलासा हुआ है।