इस ट्वीट पर भारतीयों द्वारा भी उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई गई। उन्हें कहा गया कि उनके पास दिमाग बच्चों वाला है और पाकिस्तान ने उन्हें विज्ञान और तकनीक मंत्री बनाया हुआ है।
गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि वह विरोध करने वालों की भावनाओं का सम्मान करती है लेकिन पीएम मोदी ने 50 करोड़ लोगों तक स्वच्छता सम्बंधित सुविधाएँ पहुँचाई हैं और इसीलिए उन्हें अवॉर्ड दिया जाएगा।
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा कि वह लगातार दुनिया भर में ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहाँ ज़ाकिर नाइक को भेजा जा सके लेकिन कोई भी उसे रखना ही नहीं चाहता। अगर वह भारत जाता है तो वहाँ भी उपद्रव पैदा करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'नमामि देवी नर्मदे महोत्सव' में भाग लेते हुए माँ नर्मदा की महाआरती का हिस्सा बनेंगे। इसके बाद वह गरुड़ेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। तत्पश्चात प्रधानमंत्री रायसेन गाँव में अपनी माँ हीराबेन से आशीर्वाद लेने जाएँगे।
अपने फैंस के बीच 'डार्लिंग' और 'रिबेल स्टार' के नाम से लोकप्रिय तेलुगू अभिनेता प्रभास द्वारा पूरे भारत में लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बन रही फ़िल्म का पोस्टर जारी करना सिनेप्रेमियों के लिए एक बड़ा लम्हा होगा।
2014 में पीएम बनने के बाद ह्यूस्टन इवेंट भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित करने का पीएम मोदी का तीसरा बड़ा कार्यक्रम होगा। मई 2019 में दोबारा चुने जाने के बाद अमेरिका में यह इस तरह की पीएम की पहली रैली है।
उन्होंने कहा कि दूध, दही और माखन के बिना श्रीकृष्ण की कल्पना की ही नहीं जा सकती। पीएम मोदी ने समझाया कि जिस तरह प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के बिना भगवान कृष्ण अधूरे नज़र आते हैं, उसी तरह इनके बिना भारत भी अधूरा लगेगा। उन्होंने प्रकृति से संतुलन बना कर चलने की अपील की।
यह ब्रह्मांड का पहला पुरस्कार है, जो जीतने वाले को उस चीज के लिए मिला है, जिसको वो गलत ठहराता और झूठ कहता रहा। देश में असहिष्णुता है, डर का माहौल है और अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है, ऐसा कहने वाले रवीश जी को अपनी अभिव्यक्ति के लिए ही पुरस्कार मिल गया।
"पीएम मोदी ने जो समर्थन और प्रेम इसरो वैज्ञानिकों के प्रति दिखाया है, यही हर अभिभावक को अपने बच्चों के प्रति दिखाना चाहिए, जब वो अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं। इस तरह के पल हमें अपने देश से दोबारा प्यार करने पर विवश कर देते हैं।"
चंद्रयान-2 की 'विफलता' की खबरों से उत्साहित लेफ्ट-लिबरल वर्ग की खुशियाँ ज्यादा देर तक नहीं बनी रह सकी क्योंकि इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसरो वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाने वाला वीडियो लोकप्रिय होने लगा। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के लेफ्ट लिबरल्स का प्रलाप और प्रपंच।