जिन पत्रकारों ने इस मुद्दे पर लिखा है, उनमें से किसी ने भी (उस महिला पत्रकार को छोड़कर, जिसने एक मिनट से भी कम बात की) जस्टिस सिकरी या जस्टिस पटनायक से संपर्क नहीं किया, न ही करने की कोशिश की
पीएम पर कटाक्ष करते समय जिग्नेश मेवानी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के बीच का अंतर भूल गए। अपने ट्वीट में जिग्नेश ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री 26 जनवरी के लिए भी कुछ बोलना बाक़ी रखेंगे?
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति तर्कों के धरातल पर होती है, ये पहली बार है जब राजनैतिक पार्टियाँ एक दूसरे के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं, वो भी सिर्फ एक व्यक्ति को हराने के लिए।
अमित शाह ने कहा कि इस युद्ध में एक तरफ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और गरीब कल्याण की विचारधारा है जबकि दूसरी तरफ स्वार्थ और सत्ता के लिए एकजुट लोगों का जमघट है, जिनके पास ना ही कोई नेता है और ना ही कोई नीति
PM मोदी और जस्टिस सीकरी ने सीवीसी रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आलोक वर्मा को पद से हटाने का फ़ैसला किया जबकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इन दोनों के फ़ैसले पर अपनी आपत्ति दर्ज़ की
अगर जातिगत आरक्षण से आपको समस्या नहीं है, तो फिर आर्थिक आरक्षण से तो बिलकुल ही नहीं होनी चाहिए क्योंकि जातिगत आरक्षण की जड़ में यही अवधारणा है कि इन जातियों के लोग ग़रीब और वंचित हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का यह बहुत बड़ा कदम माना जाएगा। इस फैसले से मालूम पड़ता है कि भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा नेतृत्व करने वाले लोगों के लिए जगह तैयार की जा रही है