असम ने पिछले चार दशक में इस मुद्दे पर काफी हिंसक झड़पें देखी हैं। 1978 में इसके लिए 'थ्री-D' का नारा प्रचलित हुआ थ्री-D यानी डिटेक्शन, डिलीशन और डिपोर्टेशन यानी अवैध रूप से रह रहे प्रवासी को ढूँढो (डिटेक्शन), मिटाओ (डिलीशन) और बाहर भेज दो (डिपोर्टेशन)।
एनआरसी की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए जस्टिस गोगोई ने मीडिया घरानों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के चलते इस मुद्दे को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसके चलते स्थिति खराब हो गई।
इसी महीने बीएस येद्दियुरप्पा की सरकार ने राज्य में अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का प्रस्ताव दिया था। साथ ही बंगलुरु के लिए अलग से ATS बनाने की भी घोषणा की थी।
अगर कोई अपने निवास या प्रवास का फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दस्तावेज का निरस्तीकरण भी हो जाएगा और दस्तावेज मुहैया कराने वाले बिचौलिए, कर्मचारी और अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।
चुनाव आयोग के मुताबिक नागरिक ट्रिब्यूनल का फैसला आने तक वोटर लिस्ट में मौजूद हर मतदाता को वोट डालने का अधिकार होगा। ऐसे में अब जब तक इस मामले पर फाइनल ऑर्डर नहीं आता, तब तक ये आदेश बहाल रहेगा।
कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह भी संभव है कि दिल्ली में अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और भारत सरकार का घुसपैठियों की पहचान करने का जो दिशा निर्देश है, उसके रास्ते में रोड़े अटकाने की साजिश हो।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "वे जल्द ही संसद में नागरिक संशोधन विधेयक पेश करेंगे और इसके आधार पर NRC पर जाँच शुरू होगी। उन्होंने लोगों से कहा, पश्चिम बंगाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू रह सकेंगे और बाकी अवैध प्रवासियों को बाहर किया जाएगा।"