एनआरसी में जिन 19 लाख लोगों का आँकड़ा निकाला गया है, उसमें से अधिकांश हिन्दू ही हैं। जिन 19 लाख लोगों को एनआरसी से बाहर किया गया है, उनकी अपील को अगर फोरेनर ट्रिब्यूनल ने ठुकरा दिया तो उन्हें लम्बी कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ेगी।
केंद्रीय मंत्री अरविन्द सावंत ने NRC की तारीफ़ करते हुए इसे मुंबई में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया। उन्होंने कहा, "NRC से पता चलेगा कि असम में बांग्लादेश के कितने लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इसे मुंबई में करना बहुत ज़रूरी है।"
आज बांग्लादेशी घुसपैठियों की सबसे बड़ी पैरोकार ममता बनर्जी ने एक समय (2005 में) बांग्लादेशी घुसपैठियों पर चर्चा कराने की माँग को लेकर तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी पर कागज़ फेंके थे। महीना यही था अगस्त का और तारीख थी चार।
"जब तक अपील करने का समय है, तब तक किसी को विदेशी नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार कानूनी समर्थन का विस्तार करेगी। सरकार इन लोगों की परेशानियों पर ध्यान देगी और यह देखेगी कि उनका किसी तरह का उत्पीड़न न हो।"
NRC में नहीं शामिल लोगों के मामलों पर सुनवाई के लिए 200 फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल का गठन जारी है, जिसके लिए अधिसूचना जल्दी ही जारी कर दी जाएगी। 1951 में प्रकाशित पहली NRC को अपडेट करने की कवायद सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में हो रही है।
केन्द्र और असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- "हमें एनआरसी में शामिल लोगों के लिए नमूना सत्यापन की प्रक्रिया पर फिर से विचार करने की जरूरत है।” केन्द्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि अवैध घुसपैठियों को हर हाल में अपने देश वापस जाना ही होगा।
सरकार घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए बहुआयामी तरीकों पर काम कर रही है। सीमा पर फेंसिंग कराने, फ्लड लाइट्स लगवाने, सीमा पर अच्छी सड़कें बनवाने और आउटपोस्ट्स स्थापित करने सम्बन्धी कई निर्णय लिए गए हैं।
कजरी घोष दत्ता का कहना है कि जब उन्होंने एनआरसी ड्राफ्ट में नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया, तो अधिकारियों ने उनसे रिश्वत के तौर पर 10 हजार रुपए माँगे।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से हिरासत केंद्रों, वहाँ बंद बंदियों की अवधि और विदेशी नागरिक अधिकरण के समक्ष दायर उनके मामलों की स्थिति को लेकर सरकार से विवरण माँगा।