"पाकिस्तान में न तो हिंदू लड़कियों को ज्यादा आजादी है और न ही वहाँ पढ़ाई का अच्छा माहौल है। वहाँ खुलकर जिंदगी नहीं जी जा सकती, इसलिए हम बेटियों की परवरिश के लिए भारत आए। आज नागरिकता पाने के बाद ऐसा लग रहा है जैसे मानों हमारा पुनर्जन्म हुआ हो।"
"मेरा मानना है कि जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार होगा। यह शरणार्थियों को वापस जाने की अनुमति देगा और अपने जीवनकाल में, आप वापस जाने में सक्षम होंगे... आप अपने घर वापस जा पाएँगे और आपको सुरक्षा मिलेगी, क्योंकि दुनिया में हमारे पास पहले से ही एक मॉडल है।"
लेबर पार्टी की कमान जेरेमी कोर्बिन के पास। कोर्बिन अपने भारत विरोधी रुख और कश्मीर पर पाकिस्तानी एजेंडे को हवा देने के लिए जाने जाते हैं। पिछले महीने कोर्बिन से कॉन्ग्रेस के एक प्रतिनिधमंडल ने भी मुलाकात की थी।
हैरान करने वाली बात ये है कि मृतका का पति भी एक पत्रकार ही है। दोनों ने अपनी मर्जी से (लव मैरेज) निकाह किया था। लेकिन, कुछ ही दिनों में रिश्तों में खटास आ गई।
बाजवा 29 नवंबर को रिटायर होने वाले थे। लेकिन इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली सरकार ने अगस्त में उनका कार्यकाल 3 साल के लिए बढ़ा दिया था। बाजवा नवंबर 2016 में पाक फौज के जनरल बने थे।
इमरान ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश में इलाज कराने को लेकर कथित तौर पर कोर्ट के खिलाफ और चीफ जस्टिस आसिफ सईद पर टिप्पणी की थी। जिसके बाद एक शख्स ताहिर मसूद ने लाहौर हाईकोर्ट में इमरान के खिलाफ याचिका दायर की।
नमृता चंदानी की मौत के बाद परिवारजनों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उसके गले में बंधे दुपट्टे को मौत के एक हफ्ते बाद फॉरेंसिक लैब भेजा गया था, जिसकी वजह से डीएनए नहीं लिया जा सका।
58 वर्षीय बाजवा को नवम्बर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज़ शरीफ ने इस पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद इमरान खान की सरकार ने भी बाजवा को इस पद पर रहने के लिए तीन साल का एक्सटेंशन दे दिया था।
भारतीय दूतावास के अधिकारियों के लगातार फोन आने से घबरा कर शुक्रवार को नदीम पाकिस्तान भाग गया। सोशल मीडिया एक्सपर्ट ने उसका पता लगाकर जानकारी एजेंसियों को सौंप दी है।
67 वर्षीय पाक पीएम के इस बयान पर लोगों ने उनका मज़ाक बनाया। पत्रकार नायला इनायत ने पूछा कि इतनी उम्र और अनुभव होने के बावजूद इमरान ख़ान ने ब्लड प्लेटलेट्स के बारे में नहीं सुना है। यह अजीब है।