राहुल गाँधी ने बेशर्मी से दावा कर दिया कि एक-एक महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर मोदी सरकार को ग़लत साबित कर दिया। वे भूल गए कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार नहीं, मनमोहन सरकार लेकर गई थी।
2018 में हुए मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान तब के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का वादा किया था। उन्होंने तब यह भी कहा था कि ऐसा न कर पाने की स्थिति में वो अपने मुख्यमंत्री को बदले देंगे।
...अगर गृह मंत्रालय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो गाँधी परिवार को हवाई अड्डे की सुरक्षा से आम नागरिक की तरह गुजरना होगा और घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सवार होने के लिए अन्य यात्रियों के साथ कतार में खड़ा होना होगा।
आज वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों को नमन करने का दिन था। लेकिन, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने इस मौके को भी सियासत के लिए चुना। अपने ट्वीट से राहुल गॉंधी ने जाहिर कर दिया है कि साल भर में उनकी विकृत सोच बदल नहीं पाई है।
विरोध होने के बाद राहुल गाँधी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। उन्होंने फिर से दोबारा बिना नक़्शे वाला ट्वीट किया और कोरोना वायरस को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। हालाँकि, राहुल गाँधी ने अभी तक इस पर माफी नहीं माँगी है। इससे पहले शशि थरूर भी ऐसा कर चुके हैं।
राहुल गाँधी की नर्वसता उस दिन साफ़ देखी गई कि, जब राहुल गाँधी दिल्ली की इकलौती अपनी जनसभा में बोल बैठे, "6 महीने बाद मोदी को देश के युवा डंडा मारेंगे।" दिल्ली में कॉन्ग्रेस की इकलौती जनसभा में दिया राहुल गाँधी का यह बयान पार्टी के गले की फाँस बन गया, जिसे लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं को सफाई तक देनी पड़ी।
प्रधानमंत्री के इस मजाकिया अंदाज़ से पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्षी नेता भी बेंच थपथपाते नज़र आए। इनमें से एक कोडिकुन्नील रमेश भी शामिल थे। वो कॉन्ग्रेस के सांसद हैं लेकिन जब पीएम मोदी ने बिना नाम लिए राहुल गाँधी को 'ट्यूबलाइट' कहा तो वो अपनी हँसी नहीं रोक पाए।
"1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।"
इस तरह के नोटिस राजस्थान के लगभग हर कॉलेज में जारी किए गए हैं। साथ ही कॉलेजों को टारगेट दिया गया है कि हर क्लास से कम से कम 10 बच्चे राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली में आने ही चाहिए।
सामना के संपादक और शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हम चाहते हैं कि
अयोध्या दौरे के लिए हमारे गठबंधन के नेताओं को भी साथ आना चाहिए। इतना ही नहीं राउत ने आगे ये भी कहा कि राहुल गाँधी पहले से ही मंदिरों में जाते भी हैं।