"सितंबर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जरा उन दिनों को याद कीजिए, कैसा माहौल था। भाँति-भाँति के कितने लोग मैदान में आ गए थे। कैसे-कैसे 'इंटरेस्ट ग्रुप' उस माहौल का अपने-अपने तरीके से फायदा उठाने के लिए खेल खेल रहे थे....."
“मैं आप में से एक हूँ। मेरे पूर्वज यहीं के यूपी और बिहार से थे। भारतीय संस्कृति इतनी समृद्ध है कि हमने इसे सहेज कर रखा है। फिजी का हर नागरिक मरने से पहले कम से कम एक बार भारत आने का सपना देखता है।”
दरअसल, अब दिवाली और राम मंदिर पर आने वाले फ़ैसले को देखते हुए क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होमगार्डों की ज़रूरत भी बढ़ गई है। इसलिए, होमगार्डों की ड्यूटी बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
आयोजन को राजकीय मेला घोषित किया गया है। इस दौरान अयोध्या की भव्यता देखते ही बनती है। रोशनी के खास इंतजाम के साथ-साथ देश भर के कलाकार अपने हुनर का प्रदर्शन करने के लिए इस दौरान बुलाए जाते हैं।
वसीम रिजवी ने दावा किया कि अयोध्या की विवादित ज़मीन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है ही नहीं, वो शिया वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि बाबर के जिस सेनापति ने इस मस्जिद को बनवाया था, वो एक शिया मुसलमान था।
राजदीप सरदेसाई के इस बदले सुर से सभी हैरान हैं। अपनी ही बात से पलट गए हैं। पहले उन्होंने जल्दी सुनवाई ख़त्म करने का स्वागत किया था, अब वह पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी भी क्या है? उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदला है। राजदीप जजों को ही खरी-खोटी सुनाने लगे।
"अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दूरगामी असर वाले परिणाम देखने होंगे, इसीलिए बेहतर होगा अगर सुप्रीम कोर्ट अपने इस ऐतिहासिक फैसले को कुछ इस तरह पेश करे, जिससे वह उन संवैधानिक मूल्यों का भी प्रदर्शन करे, जिन पर इस देश को भरोसा है।"
AMUOSAK की ओर से पद्मश्री मुहम्मद को सम्मानित करने के लिए समारोह का आयोजन किया गया था। कई मुस्लिम छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे थे। समारोह का उद्धाटन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को करना था।
वे पर्दे के पीछे से साजिश रचेंगे और डराने के लिए खून भी बहाएँगे। वे चाहेंगे कि माहौल बिगड़े ताकि मंदिर निर्माण टलता रहे। वे नक्शे को फाड़ेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि जिस दिन हिंदू जगेगा उनका इतिहास हर गली-नुक्कड़ पर फाड़ा जाएगा।