एक्सप्रेस ट्रिब्यून अख़बार ने सिविल अस्पताल में मेडिकल जाँच में बलात्कार की पुष्टि का दावा किया है। दावा जिले के डिस्ट्रिक्ट हेल्थ अफसर के हवाले से किया गया है।
असलम के बारे में पता चला है कि इससे पहले भी वो कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। उसने अपने ही रिश्तेदार की बच्ची का बलात्कार किया था जिसके लिए उसे साल 2014 में गिरफ़्तार भी किया गया था।
टप्पल में बच्ची के परिवार से मिलने के लिए डीएम भी पहुँचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही बाल आयोग की टीम भी मौके पर पहुँची।
'सोनम' की माँ ने कहा है कि असलम नाम के आरोपित ने अपनी 4 साल की बेटी के साथ भी बलात्कार किया था और उसकी पत्नी अपनी बेटी को लेकर अपने पिता के घर चली गई थी।
ऐसे समय में जब लोग अपनी ग़लती को सुधारने के लिए तैयार हैं और आगे की तरफ बढ़ रहे हैं, इस तरह की फ़िल्में जातिगत पहचान के पुराने ढकोसले को अपने गले से नीचे उतारने का एक बेशर्म प्रयास है, जिसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है।
एक जाँच अधिकारी ने आरोपित के ख़िलाफ़ 2011 में हलफनामा दर्ज करवाया था, लेकिन सही प्रक्रिया फॉलो न करने के कारण उसे प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया गया था। इसके बाद ये मामला उस समय सुर्खियों में आया जब दोबारा मनोज को 2012 में सपा से टिकट मिला और साथ ही उन्हें मंत्री भी बनाया गया।
गिरफ़्तार होने के बाद मौलाना ने बताया कि जब वो बच्चा था तब वो ख़ुद भी यौन शोषण का शिकार हुआ था। मौलाना ने कहा कि उसने एक व्यक्ति से बदला लेने के लिए उसकी बेटी का बलात्कार किया क्योंकि कभी उसने भी उसका (यूसुफ़) यौन उत्पीड़न किया था।