सुप्रिया सुले की पार्टी NCP ने 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, राफ़ेल फाइटर जेट्स की ख़रीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी और अनिल अंबानी पर निशाना साधा था। वहीं, दूसरी तरफ आज उन्हीं अनिल अंबानी के साथ पार्टी कर रही हैं!
अजित पवार के कदम को शरद पवार का मौन समर्थन हासिल था। उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा आखिरकार उनकी मॉंगे मान लेगी। लेकिन, जब मोदी उनके दबाव में नहीं आए तो उन्होंने भतीजे को लौट आने का संदेश भिजवाया।
शरद पवार 1978 में पार्टी तोड़ कर CM बने। 1988 में राजीव ने मुख्यमंत्री बनाया। 1990 में जोड़-तोड़ से सरकार बनाई। 1993 में तत्कालीन CM के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने। उन्होंने जो लिगेसी सेट की है, भतीजा उसका ही अनुसरण कर रहा है। मिलें अजित प्रकरण के अन्य किरदारों से।
विचारधारा में अंतर न होते हुए भी जब 50-50 के फॉर्मूले पर शिवसेना ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर एनसीपी और कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियों संग विलय की जो उत्सुकता दिखाई, उसने जनता के सामने उसके सत्तालोलुप चरित्र को सामने लाकर रख दिया। शिवसेना ने हिंदुत्व से समझौता किया।
शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी, तीनों दलों के विधायक अलग-अलग होटलों में रुके हुए हैं। उद्धव ठाकरे ने इन विधयकों से मुलाक़ात की। उन्होंने और शरद पवार ने एनसीपी विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनका ये गठबंधन लम्बे समय तक चलेगा।
शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे और शायद पवार के भाई के पोते रोहित पवार के साथ फोटो डाल कर दिखाया कि दोनों दलों के पास अगली लाइन की लीडरशिप तैयार है। रोहित और आदित्य पहले से ही दोस्त हैं। रोहित हाल ही में विधायक बने हैं।
कॉन्ग्रेस नेता ने महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर ताबड़तोड़ ट्वीट किए। मौजूदा हालात को ठाकरे परिवार के प्रतिष्ठा का सवाल बताते हुए उन्हें सड़क पर उतरने की नसीहत दी।
शिवसेना के नेता मिलिंद नार्वेकर और एकनाथ शिंदे दो एनसीपी विधायकों संजय बंसोड और बालासाहब पाटिल को मुंबई एयरपोर्ट से लेकर आए। कहा जा रहा है कि ये दोनों अजित पवार गुट के विधायक हैं।
कहा जाता है कि पवार ने 41 साल पहले जो कुछ किया था वो अपने राजनीतिक गुरु यशवंत राव चव्हाण के इशारे पर किया था। तो क्या अजित भी अपने राजनीतिक गुरु शरद पवार की मिलीभगत से ही भाजपा के पाले में गए हैं?