सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को गाली दी जाती है, तो सिर्फ गाली देने से ही SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं बन जाता।
सुप्रीम कोर्ट ने MP हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें एक सिविल जज को ट्रेन में महिला यात्री की सीट के पास पेशाब करने और हंगामा करने के लिए हटा दिया गया था।