आतंकियों को पाकिस्तानी सत्ता के संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण। 5 साल पीछे। मसूद अज़हर की वो रैली जहाँ से पठानकोट और पुलवामा हमले की पटकथा का लिखा जाना शुरू हो गया था।
शहीद जवान को कंधा देने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ,जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और भारतीय सेना के उत्तरी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवानों को श्रद्धांजलि भी दी।
फ़िलहाल, जाँच एजेंसियों को पता चला है कि पिछले तीन महीनों में जैश-ए मोहम्मद आतंकी संगठन दक्षिण कश्मीर में अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फिर से अपना नेटवर्क दुरुस्त कर रहा है।
भारत में रह कर पाकिस्तान की भाषा बोलने वालों को यह बताने का समय आ गया है कि आप ऐसी घटिया हरक़त कर के देश की जनता को और उस जनता की मदद से चला रहे अपने व्यापार को ग्रांटेड नहीं ले सकते। अब समय आ गया है।
जवानों की शहादत के बाद से पूरे देश में मातम का माहौल छाया हुआ है। कई परिवार बिलख रहे हैं, तो कई बेटे की शहादत का बदला चाहते हैं। इन शहीदों में एक नाम ठाकुर रतन सिंह का भी शामिल है।
उनकी पत्नी शिल्पी यादव ने बताया कि अवधेश तीन दिन पहले ही जल्दी लौटने का वादा कर ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। शिल्पी अपने तीन वर्ष के बेटे निखिल को कलेजे से लगा कर रो रही थी। वो बार-बार बेहोश हो रही थी।
सिद्धू ने कहा की वो इसकी कड़ी निंदा करते हैं लेकिन आतंकवाद का कोई देश या धर्म नहीं होता। सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम अक्सर सामने आता रहता है। सिद्धू पाकिस्तान के जनरल बाजवा से गले भी मिल चुके हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बैठक के हर मुद्दों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पहले से ही आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान से MFN का दर्जा छिने जाने से उसके कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा।
"पड़ोसी देश अगर ये समझता है कि जिस तरह के कृत्य वो कर रहा है, जिस तरह की साजिशें रच रहा है, उससे भारत में अस्थिरता पैदा करने में सफल हो जाएगा, तो वो बहुत बड़ी भूल कर रहा है।"
इस आतंकी घटना को अंजाम देने के पीछे आदिल अहमद डार नाम के आतंकी का हाथ है। सुरक्षाबलों का कहना है कि आदिल को पहले भी एक ऑपरेशन के दौरान घेर भी लिया गया था। लेकिन वह किसी तरह बच कर निकल गया था।