Homeबड़ी ख़बरपुलवामा आतंकी हमला: 7 संदिग्ध पुलिस हिरासत में, हमले की योजना में शामिल होने...

पुलवामा आतंकी हमला: 7 संदिग्ध पुलिस हिरासत में, हमले की योजना में शामिल होने का शक़

पुलिस अब इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक का इंतज़ाम करने में आदिल की मदद किन-किन लोगों ने की और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम होने के बावजूद वो कैसे घटनास्थल तक विस्फोटक से लदी गाड़ी लेकर पहुँचा

पुलवामा आतंकी हमले में अधिकारियों ने शुक्रवार (फ़रवरी 15, 2019) को 7 संदिग्धों को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। पुलिस को संदेह है कि 14 फरवरी को जवानों पर हुए आतंकी हमले की योजना में इन युवकों का भी हाथ है।

ख़बरों के अनुसार, पुलवामा हमले की पूरी योजना पाकिस्तान के नागरिक कामरान ने बनाई थी। जैश-ए-मोहम्मद का यह सदस्य पुलवामा, अवंतीपुर और त्राल इलाके में सक्रिय है। इस पूरे हमले को अंजाम देने वाले फ़िदायीन आतंकी की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई है। साल 2018 में जैश में शामिल होने वाला आदिल, पुलवामा के काकापुर इलाक़े का ही रहने वाला था।

बताया जा रहा है कि दक्षिण कश्मीर के त्राल इलाके के मिदूरा में इस भयावह आतंकी हमले की योजना तैयार की गई थी और कामरान ही विस्फोटकों की व्यवस्था में मददगार भी बना।

पुलिस लगातार जैश के अन्य स्थानीय सक्रीय आतंकियों की तलाश में जुटी हुई है। हालाँकि, अब तक पता नहीं लग पाया है कि महज़ 22 साल के आदिल अहमद डार ने इतने बडे़ आतंकी हमले को कैसे अंजाम दिया। आदिल एक स्कूल ड्रॉपआउट था। जिस समय उसने पढ़ाई छोड़ी, उसकी उम्र महज़ 20 साल थी। आदिल, घटना स्थल से सिर्फ़ 10 किमी की दूरी पर रहता था।

पुलिस अब इस बात की जानकारी जुटाने में लगी है कि इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक का इंतज़ाम करने में आदिल की मदद किन-किन लोगों ने की और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम होने के बावजूद वो कैसे घटनास्थल तक विस्फोटक से लदी गाड़ी लेकर पहुँचा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -