कुछ लोगों ने गाँव में कोरोना की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगे पोस्टरों को फाड़ दिया। इसके बाद देर रात गाँव में स्थित एक शिव मंदिर में शिवलिंग को तोड़कर उसे पास के ही कुएँ में फेंक दिया। इतना ही नहीं आरोपितों ने गाँव के दूसरे राधा-कृष्ण मंदिर में भी माँस का टुकड़ा फेंक दिया।
अस्पताल से भागे कोरोना पाॅजिटिव नेपाल के सुनसारी निवासी 60 वर्षीय जमाती सफीद मियाँ का उपचार सीएचसी खेकड़ा में चल रहा था। यह उपचार के दौरान अस्पताल से भाग गया है। यह व्यक्ति जिन-जिन लोगों से मिला उन्हें जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित कर देगा। जिस कारण इस व्यक्ति का उपचार होना अत्यधिक आवश्यक है।
पुलिस ने जमातियों व उनके मददगारों सलाउद्दीन, साहिल, खुदाद्दीन, शाकिर अली व हाजी हमीद के विरुद्ध धारा 188, 269, 271 आइपीसी व 51 बी आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
जमातियों के एक जगह पर एकत्र होने की सूचना पर पहुँचे दो सिपाहियों को पीटने के बाद करीब 200 लोग एकत्र हो गए और पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। भीड़ ने पुलिस चौकी को फूँकने का भी प्रयास किया।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नर्सों और मेडिकल स्टाफ के साथ अभद्रता करने के आरोप में एक जमाती को जेल भेज दिया गया है। मामला पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल का है। यह कार्रवाई डीएम के आदेश के बाद की गई।
मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।
1. लोटन निषाद चाय की दुकान पर जाते हैं। 2. तबलीगी जमातियों और कोरोना संक्रमण को लेकर टिप्पणी करते हैं। 3. पास में ही मोहम्मद सोना बैठा होता है। 4. दोनों के बीच विवाद होता है, मारपीट शुरू होती है। 5. मो. सोना तमंचे से फायर कर लोटन निषाद की जान ले लेता है।
कानपुर में जमातियों से परेशान डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ा रहे हैं। एक जगह जमा होकर नमाज अदा कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस यह पता करने में जुटी है कि उन जमातियों ने इमरान से कैसे संपर्क साधा या फिर इमरान उन्हें कैसे जानता था। पुलिस को आशंका है कि इमरान ने पहले भी जमातियों को बॉर्डर पार कराया होगा।
इस घटना के बाद मेरठ के लखवाया गाँव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया है। रहीश अपने भाइयों व अब्बू के साथ आया और अरुण को घर से खींचकर बाहर निकाल कर ले गया। इसके बाद लाठी-डंडों से उसे बुरी तरह पीटा।