पीड़िता कहती है कि इतने वर्षों में पुलिस उसकी रिकॉर्डिंग को भी जब्त करने में असफल रही है। साथ ही वे फिरौती के पैसे और वो कार, बंदूक आदि कुछ भी नहीं ढूँढ पाई जिसके बूते.....
धर्म आस्था का विषय है, व्यक्तिगत विषय है। लेकिन शायद सबके लिए नहीं! कर्नाटक के बेलगाम में एक मस्जिद में गई भीड़ के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। इस भीड़ के लिए नमाज पढ़ने से ज्यादा मस्जिद में नमाज पढ़ना जरूरी है।