"राम मंदिर निर्माण में अगर और भी जमीन की जरूरत होगी तो जमीन ली जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा जाएगा। जो पत्थर राम मंदिर के लिए रखे गए हैं, उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल निर्माण के लिए किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो और भी पत्थर मँगाए जा सकते हैं।"
जिन्होंने राम मंदिर बनवाने के लिए अपनी जाने गवाईं, उनके नाम पर शहीद स्मारक बननी चाहिए। इन 'शहीदों' के लिए श्रद्धांजलि के रूप में सरयू तट पर एक स्मारक बनवाया जाना चाहिए। अमर जवान की तरह इन शहीदों के नाम भी अमर जवान ज्योति के समान लिखा जाना चाहिए।
महंत नृत्य गोपाल दास रामजन्भूमि न्यास के भी अध्यक्ष हैं। परमहंस रामचंद्र दास के निधन के बाद वे न्यास के अध्यक्ष चुने गए थे। परमहंस रामचंद्र दास ने करीब 70 साल तक रामलला की लड़ाई थी।
"जब राम मंदिर बनेगा तो वहाँ उनके इष्ट देव शिव भी होंगे और सबको पता है कि शिव के निवास का एक स्थान श्मशान भी है, इसलिए मुस्लिम पक्ष को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।"
“वर्तमान में राम जन्मभूमि के 67 एकड़ के परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं है।” - जिला प्रशासन ने यह प्रतिक्रिया एक पत्र के जवाब में दी है, जिसमें कहा गया था कि बाबरी स्थल के आसपास कब्रिस्तान है।
"साल 1855 के दंगों में 75 मुस्लिम मारे गए थे और सभी को यहीं दफन किया गया था। ऐसे में क्या राम मंदिर की नींव मुस्लिमों की कब्र पर रखी जा सकती है? इसका फैसला ट्रस्ट के मैनेजमेंट को करना होगा।"
सबसे पहले 67 एकड़ की भूमि का माप लिया जाएगा और ज़मीन को सीमांकित किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन किया जाएगा कि वो मंदिर का शिलान्यास करें। मंदिर परिसर का कुल क्षेत्रफल 100 एकड़ हो सकता है।
"सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के मुताबिक मस्जिद निर्माण के लिए भूमि उपयुक्त जगह पर नहीं दी गई है। वहाँ अयोध्या के लोग नमाज पढ़ने नहीं जा सकते। हम अब राज्य सरकार के आवंटन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।"
एंकर कहती है कि 1992 में जब हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद को शहीद करने के लिए धावा बोला था तो वहाँ कई मुस्लिम शहीद हो गए थे। उन मुस्लिमों की रूहें आज भी इस मस्जिद में मौजूद हैं, जो अब बाबरी मस्जिद को शहीद होने से रोक रहे हैं।